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Sunday, October 25, 2026

E20 पेट्रोल पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी! जानिए इंजन खराब होने की सच्चाई

E20: पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) के बारे में सोशल मीडिया पर चल रही अलग-अलग जानकारियों के बीच, केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10-सूत्रीय स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि E20 प्रोग्राम वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और रेगुलेटरी मानकों पर आधारित है। मंत्रालय ने ज़्यादा पानी की खपत, इंजन खराब होने, वारंटी खत्म होने और पर्यावरण को नुकसान जैसे कई दावों को गुमराह करने वाला बताया।

एक लीटर इथेनॉल बनाने में कितना पानी लगता है?

मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताया कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी की ज़रूरत होती है। सरकार के अनुसार, आधुनिक इथेनॉल डिस्टिलरी में प्रति लीटर इथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर पानी का इस्तेमाल होता है, और ज़्यादातर प्लांट पानी रीसाइक्लिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि मंज़ूरी मिलने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त चावल—जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के बाद ही उपलब्ध होता है—का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, इथेनॉल उत्पादन में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज़्यादा है, और धान की तुलना में इसकी सिंचाई की ज़रूरतें कम हैं।

क्या E20 फ्यूल इंजन को नुकसान पहुंचाता है?

सरकार ने कहा कि E20 के कारण इंजन खराब होने या गाड़ी की परफॉर्मेंस खराब होने के दावों की वैज्ञानिक अध्ययनों से पुष्टि नहीं हुई है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा पैसेंजर कारों और दोपहिया वाहनों पर किए गए व्यापक परीक्षणों में ड्राइविंग परफॉर्मेंस या फ्यूल एफिशिएंसी पर कोई खास बुरा असर नहीं दिखा। हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि कुछ पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें: निरसा फ्लाईओवर विवाद: विधायक अरूप चटर्जी ने धमकी मिलने का लगाया आरोप, सांसद ढुलू महतो का भी किया जिक्र

क्या E20 का इस्तेमाल करने से वारंटी और इंश्योरेंस खत्म हो जाता है?

मंत्रालय ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से गाड़ी की वारंटी या इंश्योरेंस अमान्य हो जाता है। सरकार के अनुसार, E20 कम्पैटिबिलिटी के लिए डिज़ाइन या मंज़ूर की गई गाड़ियों पर मैन्युफैक्चरर की वारंटी और इंश्योरेंस की शर्तें पूरी तरह लागू रहती हैं। पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा हो रहा है? सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में काफी कमी आई है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रोग्राम से विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, किसानों को भुगतान तेज़ी से हुआ है और ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत हुई है। सरकार ने बताया कि भारत ने दिसंबर 2025 की समय-सीमा से पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। फिलहाल, देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है और 2025-26 सप्लाई वर्ष के लिए 1,200 करोड़ लीटर से ज़्यादा इथेनॉल की खरीद का अनुमान है।

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