Early Arya Research Paper: धनबाद की शोधार्थी अर्ली आर्या ने इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों से नई पहचान बनाई है। उनका शोध-पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management (IJCOPE) में प्रकाशित हुआ है। इस उपलब्धि के बाद शिक्षाविदों और स्थानीय लोगों ने इसे धनबाद और झारखंड के लिए गर्व का विषय बताया है।
Highlights:
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
अर्ली आर्या का शोध-पत्र “Site Catchment Analysis with Special Reference to Hastinapur” अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इससे पहले उनका शोध वर्ष 2025 में आयोजित World Archaeological Congress (WAC) में भी प्रस्तुत और प्रकाशित हो चुका है। इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में उनके शोध कार्य को अकादमिक जगत में सराहना मिल रही है।
शिक्षा में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन
अर्ली आर्या ने अपनी स्कूली शिक्षा धनबाद के De Nobili School, CMRI और Carmel School से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की, जहां वे विश्वविद्यालय की मेधावी छात्राओं में शामिल रहीं। आगे रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) प्राप्त किया।

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इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
अर्ली आर्या ने Archaeological Survey of India (ASI), Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) तथा Indian Council of Historical Research (ICHR) जैसी संस्थाओं के साथ कार्य करते हुए इतिहास और पुरातत्व से जुड़े विभिन्न शोध कार्यों में योगदान दिया है। वर्तमान में वह बनस्थली विद्यापीठ में शोध कार्य कर रही हैं।

धनबाद और झारखंड के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि
धनबाद के हीरापुर निवासी गोपाल प्रसाद साव और मीरा बाला देवी की पुत्री अर्ली आर्या का विवाह वर्ष 2025 में सांसद ढुल्लू महतो के परिवार में हुआ। उनके पति खुशवंत कुमार ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे परिवार और समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। अर्ली आर्या की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि समर्पण, निरंतर अध्ययन और शोध के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई जा सकती है।

उनकी सफलता को शिक्षा, शोध और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।






















