Nalanda University Book Exhibition 2026: भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के मौके पर ऐतिहासिक राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में ज्ञान और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। विश्वविद्यालय परिसर के बहुउद्देशीय सभागार में पांच दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी 14 अगस्त से शुरू होकर 18 अगस्त तक चलेगी।
Highlights:
नालंदा यूनिवर्सिटी में 14 से 18 अगस्त तक पुस्तक प्रदर्शनी
पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने हिस्सा लिया है। प्रदर्शनी में कुल 14 बुक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां अलग-अलग विषयों से जुड़ी किताबें पाठकों और शोधार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। प्रदर्शनी में साहित्य, इतिहास, दर्शन, प्रबंधन, विज्ञान सहित कई विषयों की नवीनतम और दुर्लभ पुस्तकों को शामिल किया गया है। इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों को अपनी जरूरत के अनुसार किताबों का चयन करने का अवसर मिल रहा है।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लगाए स्टॉल
पुस्तक प्रदर्शनी में भारत सरकार के पब्लिकेशन डिवीजन, मोतीलाल बनारसीदास इंडोलॉजिकल बुक्स, ओरिएंट ब्लैकस्वान प्राइवेट लिमिटेड, पीटर लैंग ग्रुप, नेशनल बुक ट्रस्ट और प्रथम बुक्स समेत कई प्रतिष्ठित प्रकाशक शामिल हुए हैं। एक ही स्थान पर अलग-अलग विषयों की पुस्तकों की उपलब्धता से पुस्तक प्रेमियों और अकादमिक जगत से जुड़े लोगों को काफी सुविधा मिल रही है। खासतौर पर विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के लिए नई पुस्तकों के चयन में भी प्रदर्शनी उपयोगी साबित हो रही है।
शिक्षकों और छात्रों के लिए उपयोगी पहल
नालंदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के विजिटिंग प्रोफेसर प्रोफेसर पी. के. बिस्वास ने पुस्तक प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस तरह की प्रदर्शनी बेहद जरूरी है। इससे फैकल्टी सदस्य किताबों को सीधे देखकर अपनी जरूरत के अनुसार उनका चयन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तक प्रदर्शनी का लाभ छात्रों को भी मिलता है। विद्यार्थी किताबों को स्वयं देखकर उनके विषय, लेखक और सामग्री के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इससे किताबों के साथ उनका सीधा जुड़ाव मजबूत होता है।
नई लाइब्रेरी के विकास में अहम भूमिका
नालंदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज, फिलॉसफी एंड कंपैरेटिव रिलिजंस के टीचिंग एसोसिएट और तिब्बती विद्वान गेशे लुंगटोक शेरप ने प्रदर्शनी को विश्वविद्यालय की नई लाइब्रेरी के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय तेजी से विकसित हो रहा है और नई लाइब्रेरी के लिए बड़ी संख्या में पुस्तकों और पांडुलिपियों की जरूरत है। प्रदर्शनी में उपलब्ध कई पुस्तकों को छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए लाइब्रेरी में शामिल करने की अनुशंसा की जा रही है। गेशे लुंगटोक ने बताया कि उनकी विशेष रुचि बुद्धिस्ट फिलॉसफी और एथिक्स से संबंधित पुस्तकों में है। प्रदर्शनी में ऐसी कई दुर्लभ पुस्तकें मौजूद हैं, जो वर्तमान लाइब्रेरी में उपलब्ध नहीं हैं।

प्राचीन नालंदा की ज्ञान परंपरा को मिल रही नई दिशा
गेशे लुंगटोक ने प्राचीन नालंदा की गौरवशाली ज्ञान परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में तिब्बत, जापान, कोरिया और चीन समेत कई देशों से विद्यार्थी नालंदा अध्ययन के लिए आते थे। वर्तमान नालंदा विश्वविद्यालय भी उसी ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और शोध से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां संस्कृत, पाली, तिब्बतन और चाइनीज जैसी भाषाओं की पढ़ाई भी कराई जा रही है। राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित यह पुस्तक प्रदर्शनी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के नए स्रोत उपलब्ध कराने के साथ-साथ नालंदा की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है।






















