Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर प्रस्तावित चुनाव से पहले पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दिव्या ज्योति के जन सुराज पार्टी में शामिल होने के बाद उनके इस सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा शुरू हो गई है।
Highlights:
दिव्या ज्योति ने मंगलवार को पटना में जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रभावित रही हैं और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने जन सुराज का हिस्सा बनने का फैसला किया है।
चुनाव लड़ने के सवाल पर दिव्या ज्योति ने क्या कहा?
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनाव लड़ने को लेकर जब दिव्या ज्योति से सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व और प्रशांत किशोर की ओर से जो जिम्मेदारी या निर्देश दिया जाएगा, वह उसके अनुसार काम करेंगी।
हालांकि, उनके पार्टी में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि जन सुराज उन्हें पटना शिक्षक सीट से संभावित उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार सकती है।
कौन हैं दिव्या ज्योति?
दिव्या ज्योति पटना की रहने वाली हैं और उनका मूल संबंध बाढ़ से बताया जाता है। वह चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ भी हैं।
शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर वह पहले से सक्रिय रही हैं। उनके मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की मदद, बालिका शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान जैसे विषय उनके काम के प्रमुख हिस्से रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दिव्या ज्योति इससे पहले भी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी थीं।
अब राजनीतिक दल का समर्थन मिलने की संभावना से उनकी चुनावी स्थिति पहले की तुलना में अलग हो सकती है।
पटना शिक्षक सीट पर लंबे समय से BJP का दबदबा
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा समर्थित नवल किशोर यादव का लंबे समय से प्रभाव रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह 1996 से लगातार इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं।
ऐसे में अगर जन सुराज दिव्या ज्योति को उम्मीदवार बनाती है तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। एक तरफ भाजपा अपने पुराने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं जन सुराज इस सीट पर अपना आधार मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
हालांकि, अभी जन सुराज की ओर से दिव्या ज्योति की उम्मीदवारी को लेकर औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
प्रशांत किशोर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र?
जन सुराज पहले ही बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकता है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां संबंधित क्षेत्र के पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नवादा और नालंदा जिले शामिल हैं।
जन सुराज अगर यहां मजबूत उम्मीदवार उतारती है तो पार्टी को शिक्षक समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
यह भी पढ़ें: Gen Z Networking: 83% भारतीय युवा नेटवर्किंग से क्यों बचते हैं? LinkedIn रिपोर्ट में चौंकाने वाली वजह
नवंबर में खत्म हो रहा है मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल
बिहार विधान परिषद की कुल आठ सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। इनमें पटना शिक्षक के अलावा पटना स्नातक, सारण शिक्षक, तिरहुत शिक्षक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
इन सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित होने की संभावना है। चुनाव की आधिकारिक घोषणा के बाद ही उम्मीदवारों और मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
फिलहाल दिव्या ज्योति का जन सुराज में आना पटना शिक्षक सीट की राजनीति के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है, तो लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाली इस सीट पर एक नया राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।






















