N. Chandrasekaran को फिर मिली Tata Sons की कमान
Tata Sons Chairman: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के बोर्ड ने N. Chandrasekaran को कार्यकारी चेयरमैन के पद पर एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में लिया गया। Tata Sons के मुताबिक, बोर्ड के अनुरोध के बाद चंद्रशेखरन ने अपने पहले के फैसले पर दोबारा विचार करने की सहमति दी। इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनके कार्यकाल को वर्तमान अवधि खत्म होने के बाद पांच साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।
Highlights:
एक महीने पहले दोबारा नियुक्ति से किया था इनकार
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को बोर्ड को पत्र लिखकर कहा था कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। उनके इस फैसले के बाद Tata Sons में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, अब बोर्ड के अनुरोध के बाद उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और नई पांच साल की अवधि के लिए नियुक्ति को स्वीकार किया।
Noel Tata ने पुनर्नियुक्ति का किया विरोध
बोर्ड के फैसले पर Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने असहमति जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, बोर्ड में चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में मतदान किया, जबकि Noel Tata ने इसका विरोध किया। Tata Sons के बोर्ड में Tata Trusts के दो नामित निदेशक हैं। नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक में कहा कि चंद्रशेखरन का अगस्त में दोबारा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला उनका अपना निर्णय था और Tata Trusts ने उसे स्वीकार कर लिया था। Tata Trusts ने बाद में बोर्ड के फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाया और इसे कानूनी रूप से अमान्य बताया। यह Tata Trusts की स्थिति है; इस पर आगे कानूनी और कॉरपोरेट प्रक्रिया का असर पड़ सकता है।
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Tata Sons की लिस्टिंग का फैसला भी अहम
बोर्ड बैठक में चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति के अलावा Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बोर्ड ने RBI के नियामकीय निर्देशों के अनुरूप कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इससे Tata Sons के भविष्य के कॉरपोरेट ढांचे और शासन व्यवस्था को लेकर चर्चा और महत्वपूर्ण हो गई है। चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के साथ कंपनी को नियामकीय आवश्यकताओं, समूह की अलग-अलग कंपनियों से जुड़े कारोबारी मुद्दों और शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर Tata Trusts की आपत्ति के बाद अब आगे की कॉरपोरेट प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड के फैसलों को शेयरधारकों की बैठक में भी अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस घटनाक्रम ने Tata Sons में नेतृत्व और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल बोर्ड का निर्णय चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए चेयरमैन के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में है, जबकि Tata Trusts की आपत्ति के कारण आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।






















