Dhanbad School Computer Initiative: अगर किसी बच्चे में सीखने की ललक हो और उसे सही दिशा मिल जाए, तो उसके सपनों को नई उड़ान मिल सकती है। धनबाद में एक नन्हीं छात्रा की छोटी-सी मांग पर जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महज 48 घंटे में उसके विद्यालय को कंप्यूटर की सौगात दी। कंप्यूटर मिलने से स्कूल के बच्चों में खुशी का माहौल है।
Highlights:
स्कूल निरीक्षण के दौरान छात्रा ने रखी कंप्यूटर की मांग
दरअसल, 28 अक्टूबर को उपायुक्त आदित्य रंजन और एसएसपी प्रभात कुमार गोविंदपुर प्रखंड के किस्टोपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालय की व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी ली। इसी दौरान एक छात्रा ने उपायुक्त से स्कूल में कंप्यूटर लगवाने की मांग की। बच्ची ने चाहा कि उसे और उसके सहपाठियों को भी कंप्यूटर सीखने और तकनीकी शिक्षा हासिल करने का अवसर मिले।
एक नन्हीं छात्रा की मांग पर सिर्फ 48 घंटे में प्राथमिक विद्यालय किस्टोपुर पहुंचा कंप्यूटर, अब ग्रामीण बच्चे भी सीखेंगे डिजिटल शिक्षा का हुनर।#EducationForAll @prdjharkhand pic.twitter.com/6Q8wIqmr5k
— DC Dhanbad (@dc_dhanbad) October 31, 2026
उपायुक्त आदित्य रंजन ने तुरंत दिया निर्देश
नन्हीं छात्रा की मांग सुनकर उपायुक्त आदित्य रंजन ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालय में तत्काल कंप्यूटर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी तकनीकी शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिल सके।

महज 48 घंटे में स्कूल में स्थापित हुआ कंप्यूटर
उपायुक्त के निर्देश का असर जल्द ही देखने को मिला। 28 अक्टूबर को हुई मांग के बाद 31 अक्टूबर को किस्टोपुर प्राथमिक विद्यालय में कंप्यूटर सेट स्थापित कर दिया गया। इस तरह छात्रा की मांग महज 48 घंटे में पूरी हो गई। विद्यालय में कंप्यूटर पहुंचने पर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। जिस सुविधा की मांग छात्रा ने अपने और साथियों के बेहतर सीखने के लिए की थी, वह अब उनके स्कूल में उपलब्ध हो गई है।

ग्रामीण बच्चों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की पहल
स्कूल में कंप्यूटर की उपलब्धता को ग्रामीण बच्चों के लिए तकनीकी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे बच्चों को शुरुआती स्तर पर कंप्यूटर से परिचित होने और डिजिटल शिक्षा की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। एक छात्रा की जिज्ञासा और सीखने की इच्छा ने प्रशासन का ध्यान विद्यालय की जरूरत की ओर खींचा। यह पहल बताती है कि बच्चों की छोटी-सी मांग भी उनकी शिक्षा और भविष्य के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है।























