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Saturday, August 1, 2026

विदाई बेला पर चीफ जस्टिस बोले, हर पद सेवा का अवसर है, ताकत नहीं…

दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई शुक्रवार को अपने आख़िरी कार्यदिवस पर भावुक दिखे। वह 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। अदालत कक्ष में जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया—गर्मजोशी भरी निगाहें, वकीलों की कविताएं और सम्मान ने माहौल को भावुक बना दिया।

जस्टिस गवई ने कहा—“आप सबकी भावनाएं सुनकर मैं भीतर तक छू गया हूं। हर पद शक्ति नहीं, सेवा का अवसर होता है।”

उनकी बेंच पर उनके साथ मौजूद थे अगले CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनोद चंद्रन, एक नई शुरुआत के गवाह।

उन्होंने 1985 में वकालत से शुरू हुई अपनी 40 साल की यात्रा को याद करते हुए कहा—
“मैं कल भी न्याय का छात्र था और आज भी वही हूं।”
डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति सम्मान हर शब्द में झलकता रहा—
“मेरी न्यायिक सोच रही है—आर्थिक और राजनीतिक न्याय में संतुलन। पर्यावरण संरक्षण हमेशा मेरे दिल के सबसे करीब रहा।”

“अपने ही समाज की नाराज़गी झेली, लेकिन संविधान से समझौता नहीं किया”

SCBA के विदाई समारोह में जस्टिस गवई ने अपने सबसे कठिन फैसलों में से एक को याद किया—
SC समुदाय के क्रीमी लेयर को आरक्षण न देने वाले फैसले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा—
“उस निर्णय के बाद अपने ही समाज की नाराज़गी झेलनी पड़ी, लेकिन बराबरी, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व—ये चार मूल्य मेरे दिल में बसते हैं। संविधान ही सर्वोपरि है।”

उन्होंने 2021 के ट्राइब्यूनल सुधार कानून के कई प्रावधानों को रद्द करने के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा—
“न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान का मूल ढांचा है। इसमें कोई समझौता नहीं।”

“40 साल की यात्रा—एक इतिहास”

छोटी जगह अमरावती, साधारण परिवार, और बड़ी आकांक्षा…
जस्टिस गवई बोले—
“माता–पिता के संस्कार और संविधान के रास्ते ने मुझे यहां तक पहुंचाया।”

वे भारतीय न्यायपालिका में दूसरे दलित और पहले बौद्ध चीफ जस्टिस रहे।

कोर्टरूम से निकलते समय उन्होंने आखिरी बार कहा—
“मैं पूरी संतुष्टि के साथ जा रहा हूं कि देश के लिए जो कर सकता था, किया। धन्यवाद।”

सहकर्मियों की भावुक विदाई

जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा—“वो मेरे भाई जैसे हैं। हर मामले को धैर्य और गरिमा से संभाला। उनकी कठोरता में भी हास्य छिपा होता था। जुर्माना लगाने की धमकी देते थे, पर लगाते कभी नहीं थे।”

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा—“भूषण का अर्थ है—सजावट। उन्होंने न्यायपालिका को सजाया।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बोले—“आप इंसान के तौर पर कभी नहीं बदले—हमेशा सरल, सहज और विनम्र रहे।”

 

 

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