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साहिबगंज: पति ने खुद कराया पत्नी का प्रेमी से विवाह, बाद में गाना गाकर जाहिर की अपनी बात

साहिबगंज में अनोखा विवाह: 8 साल पुराने रिश्ते को भूल पति विनोद मंडल ने खुद कराई पत्नी की प्रेमी गोलू कुमार से शादी

साहिबगंज, झारखंड: झारखंड के साहिबगंज जिले में एक ऐसा अनूठा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में आग की तरह फैल रही है। साहिबगंज नयाटोला मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र में 8 साल पुराने शादीशुदा रिश्ते के बाद एक पति ने बड़ा दिल दिखाते हुए अपनी पत्नी का विवाह उसके प्रेमी से पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया। इस घटना के बाद स्थानीय लोग पति के इस अनोखे फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

8 साल पुराना रिश्ता और इंस्टाग्राम का इश्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साहिबगंज नयाटोला मिर्जाचौकी निवासी विनोद मंडल और नीलम देवी का विवाह लगभग आठ वर्ष पूर्व हुआ था। दोनों का दांपत्य जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन कुछ समय पूर्व नीलम देवी का संपर्क सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) के माध्यम से बाखरपुर निवासी गोलू कुमार से हुआ। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और यह संपर्क गहरे प्रेम संबंध में बदल गया। जब इस प्रेम-प्रसंग की बात पति विनोद मंडल के सामने आई, तो उन्होंने मामले को शांत तरीके से सुलझाने की कोशिश की।

समझाने की कोशिश रही नाकाम, फिर लिया फैसला

पति विनोद मंडल ने नीलम देवी और उसके प्रेमी गोलू कुमार दोनों को कई बार समझाने का प्रयास किया और अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश की। हालांकि, दोनों अपने प्रेम संबंध पर कायम रहे और एक-दूसरे के साथ रहने की इच्छा जताई। स्थिति की गंभीरता और दोनों की अडिग इच्छा को देखते हुए, विनोद मंडल ने विवाद बढ़ाने या कानूनी उलझनों में पड़ने की बजाय आपसी सहमति से मामला सुलझाने का फैसला लिया। उन्होंने अपनी पत्नी नीलम देवी को उसके प्रेमी गोलू कुमार के साथ नया जीवन शुरू करने और विवाह करने की अनुमति दे दी।

गैलेक्सी मैदान में जुटी भीड़, हुआ रीति-रिवाज से विवाह

आपसी सहमति बनने के बाद मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के गैलेक्सी मैदान निचला टोला में विवाह का आयोजन किया गया। स्थानीय ग्रामीणों और दोनों पक्षों के परिजनों की मौजूदगी में नीलम देवी और गोलू कुमार का विवाह संपन्न हुआ। इस अनोखे विवाह को देखने के लिए मौके पर भारी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। शादी के बाद नवविवाहित जोड़े ने मीडिया को बताया कि उन्होंने पूरी तरह अपनी मर्जी और सहमति से यह कदम उठाया है। गोलू कुमार ने भी स्पष्ट किया कि उसके माता-पिता इस रिश्ते से खुश हैं और वह अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखेगा।

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‘खुश रहो, खुश रहो’ गाने से बयां की अपनी भावनाएं

विवाह का सबसे भावुक और चौंकाने वाला पल तब सामने आया जब पति विनोद मंडल ने अपनी पूर्व पत्नी को विदा करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। विनोद ने फिल्म ‘नसीब’ के मशहूर गीत ‘खुश रहो, खुश रहो’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए गाना गाया और नवविवाहित जोड़े को नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। उनका यह रवैया लोगों के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है।

अनोखे फैसले पर समाज की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

विनोद मंडल के इस कदम पर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि विवाद और हिंसा की जगह शांतिपूर्ण तरीके से अलग होना और पत्नी की इच्छा का सम्मान करना विनोद की परिपक्वता को दर्शाता है। वहीं, कुछ लोग इसे सामाजिक परंपराओं के दृष्टिकोण से अनोखा और लीक से हटकर मान रहे हैं। हालांकि, मामले से जुड़ी परिस्थितियां और दोनों पक्षों की निजी स्थिति सीमित है, इसलिए स्थानीय चर्चाओं को केवल सामाजिक मत के रूप में ही देखा जा रहा है।

Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना से पहले नोट कर लें पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट, एक भी चीज न छूटे

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Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:14 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर की सुबह 7:54 बजे समाप्त होगी।

मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।

भगवान गणेश को क्यों कहा जाता है विघ्नहर्ता?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का आह्वान करने की परंपरा है।

भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ बाधाओं को दूर करने वाला है। मान्यता है कि गणपति की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को ज्ञान, बुद्धि एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणेश चतुर्थी को अलग-अलग क्षेत्रों में विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। कई स्थानों पर गणपति की प्रतिमा स्थापित कर कई दिनों तक पूजा, आरती और भोग का आयोजन किया जाता है।

गणेश जी के अलग-अलग रूपों का क्या है महत्व?

ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, भगवान गणेश के स्वरूप के अलग-अलग अंगों को भी प्रतीकात्मक महत्व दिया जाता है।

उनका बड़ा सिर ज्ञान और गहरी सोच का प्रतीक माना जाता है। बड़े कान अधिक सुनने की सीख देते हैं, जबकि छोटा मुंह कम बोलने के महत्व का संदेश देता है।

गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा की स्थापना को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में ही नहीं देखा जाता, बल्कि इसे परिवार में भक्ति, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण बनाने का अवसर भी माना जाता है।

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री की पूरी सूची

गणपति पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है। हालांकि, सामान्य पूजा के लिए इन चीजों की जरूरत पड़ सकती है:

  • भगवान गणेश की प्रतिमा
  • लकड़ी की चौकी
  • लाल या पीला कपड़ा
  • कलश
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल
  • रोली और कुमकुम
  • अक्षत
  • हल्दी
  • मौली या कलावा
  • गंगाजल
  • फूल और माला
  • दूर्वा घास
  • अगरबत्ती और धूप
  • दीपक और घी
  • कपूर
  • पंचामृत
  • फल
  • मोदक या लड्डू
  • पान और सुपारी
  • दक्षिणा
  • मिठाई

गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने की सही विधि

गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले पूजा स्थल और घर की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद ऐसी जगह चुनें, जहां परिवार के सदस्य आसानी से पूजा में शामिल हो सकें।

पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखें और उसके ऊपर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के नीचे अक्षत रखे जा सकते हैं। अक्षत के लिए साबुत और साफ चावल का इस्तेमाल करने की परंपरा है।

इसके बाद गणेश जी के सामने या दाईं ओर कलश स्थापित कर पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करने के बाद भगवान गणेश का ध्यान और आह्वान करें।

यदि आप प्राण प्रतिष्ठा की पूरी वैदिक प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं, तो किसी योग्य आचार्य या पंडित की सहायता लेना बेहतर माना जाता है। सामान्य घरेलू पूजा में श्रद्धा के साथ भगवान गणेश का ध्यान, आह्वान और पूजन किया जा सकता है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, बुद्धि और मंगल की कामना करते हैं।

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जिस खिलाड़ी ने देश का नाम रोशन किया, आज उसी के सामने रोजी-रोटी का संकट; जानिए पैरा एथलीट पुष्पा मिंज की कहानी

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रांची: खेल के मैदान पर देश और झारखंड का नाम रोशन करने वाली पैरा एथलीट पुष्पा मिंज आज आर्थिक परेशानियों से जूझ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी पुष्पा मिंज फिलहाल रांची के कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेचकर अपना गुजारा कर रही हैं।

पुष्पा मिंज ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीते हैं। एशियन स्तर की प्रतियोगिता में भी उनके नाम ब्रॉन्ज मेडल है। इसके बावजूद उनकी मौजूदा जिंदगी आर्थिक संघर्ष से गुजर रही है।

कोरोना के बाद सब्जी बेचने को हुईं मजबूर

पुष्पा मिंज के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वह कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेच रही हैं। कोरोना महामारी के बाद उन्होंने आजीविका चलाने के लिए यह काम शुरू किया। इससे पहले वह कॉलेज में पढ़ाई करती थीं।

वर्तमान में वह रांची में किराये के मकान में रहती हैं और करीब 2 हजार रुपये मासिक किराया देती हैं। उनके मुताबिक, वह सुबह करीब 6:30 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक सब्जी बेचती हैं।

पुष्पा मिंज बताती हैं कि रोजाना करीब 100 से 200 रुपये तक की ही बिक्री हो पाती है। कई बार पूरी सब्जी नहीं बिकती और खराब होने के कारण उसे फेंकना पड़ता है। ऐसे में सब्जी खरीदने में लगाया गया पैसा भी वापस नहीं निकल पाता।

आर्थिक परेशानी के बावजूद खेल जारी

आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी पुष्पा मिंज ने खेल से दूरी नहीं बनाई है। वह अब भी थ्रोबॉल की प्रैक्टिस करती हैं। हालांकि, अभ्यास स्थल तक आने-जाने का खर्च भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है।

पुष्पा मिंज का कहना है कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए रहने और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें अपना मैदान और हॉस्टल जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। वह चाहती हैं कि खिलाड़ियों के लिए रहने की व्यवस्था और थ्रोबॉल अभ्यास के लिए अलग मैदान उपलब्ध कराया जाए।

उनका कहना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने पर वह अपने खेल को और आगे ले जा सकती हैं।

नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में किया भारत का प्रतिनिधित्व

पुष्पा मिंज ने नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। पुष्पा मिंज अपने खेल सफर में कोच मुकेश को महत्वपूर्ण योगदान देने वाला व्यक्ति बताती हैं। उनके अनुसार, कोच ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार सहयोग दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी राशि मिलने का इंतजार

पुष्पा मिंज के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी। उस दौरान खिलाड़ियों का सम्मान किया गया था।

पुष्पा मिंज का दावा है कि प्रतियोगिता में हुए खर्च की राशि वापस किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें अभी तक वह राशि नहीं मिली है। इस संबंध में उनकी ओर से बताई गई स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।

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सरकार से नौकरी की मांग, ताकि खेल पर दे सकें पूरा ध्यान

पुष्पा मिंज की सबसे बड़ी मांग सरकारी नौकरी है। उनका कहना है कि नौकरी मिलने से उन्हें सब्जी बेचकर आजीविका चलाने की मजबूरी से राहत मिलेगी और वह अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकेंगी।

उन्होंने कहा कि उन्होंने देश और झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए कई पदक जीते हैं और आज भी उनके अंदर आगे बढ़ने का जज्बा है। वह चाहती हैं कि सरकार उन्हें ऐसी नौकरी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए, जिससे उनका जीवन स्थिर हो सके और वह नियमित अभ्यास कर भविष्य में देश के लिए और पदक जीत सकें।

NTPC की CSR पहल से 30 युवाओं को मिला रोजगार का हुनर, 7 महीने की ट्रेनिंग के बाद बड़ा मौका

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रांची: NTPC की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत हजारीबाग स्थित कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के 30 युवाओं को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया गया। युवाओं ने सात महीने का आवासीय कौशल विकास प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद टाटीसिलवे स्थित फ्रंटलाइन ग्लोबल सर्विसेज चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रशिक्षण केंद्र में प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का संचालन भी इसी संस्था की ओर से किया गया।

गेस्ट सर्विस एसोसिएट पाठ्यक्रम में मिला प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के ‘गेस्ट सर्विस एसोसिएट (फूड एंड बेवरेज)’ पाठ्यक्रम से जुड़ी जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान किए गए।

इस प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को होटल, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार के लिए जरूरी उद्योग आधारित कौशल से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य परियोजना प्रभावित परिवारों के युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।

प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में दिया आत्मविश्वास का संदेश

प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में NTPC माइनिंग मुख्यालय के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) प्रभात राम समेत प्रशिक्षण संस्था के पदाधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।

इस दौरान प्रभात राम ने प्रशिक्षुओं को अपने कौशल और क्षमता को पहचानने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं से बाहरी दुनिया की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने से नए अवसर हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने कौशल का बेहतर इस्तेमाल कर भविष्य में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

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रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में CSR पहल

NTPC की यह पहल केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से परियोजना प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सात महीने के आवासीय प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को एक ऐसे क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है, जहां उद्योग आधारित कौशल की आवश्यकता होती है। प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण रोजगार और बेहतर आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने का आधार बन सकता है।

NTPC की ओर से परियोजनाओं से जुड़े समुदायों के लिए ऐसी दीर्घकालिक और रोजगारपरक CSR गतिविधियों को जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।

फर्जी IPS बनकर पुलिस को दिया आदेश, NH-139 पर कराई वाहनों की जांच; दो गिरफ्तार

औरंगाबाद: खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर औरंगाबाद पुलिस को अपने प्रभाव में ले लिया। उसने थाने के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन किया और खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताते हुए छापेमारी के लिए पुलिस बल की मांग की।

पुलिस ने उसके दावे पर भरोसा किया और गश्ती दल उसके साथ चल पड़ा। इसके बाद कथित फर्जी अधिकारी के निर्देश पर NH-139 पर वाहनों की जांच कराई गई। जसोइया मोड़ से पटना जाने वाली सड़क पर सीमेंट फैक्ट्री तक पुलिसकर्मियों ने वाहनों को रोककर पूछताछ की। इस दौरान सब्जी कारोबारी समेत कई लोगों से पूछताछ की गई।

रेलवे स्टेशन पर दो युवकों को स्कॉर्पियो में बैठाया

इसके बाद पुलिस टीम अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन की ओर गई। यहां शहर की तरफ आ रहे एक टेंपो को रोककर तीन यात्रियों से पूछताछ की गई।

इनमें पलामू के हरिहरगंज थाना क्षेत्र के आलोक कुमार और सुनील कुमार रवि भी शामिल थे। कथित फर्जी IPS ने दोनों युवकों को अपनी स्कॉर्पियो में बैठा लिया और मदनपुर की ओर ले गया। वहीं तीसरे युवक अजय कुमार को छोड़ दिया गया।

अजय कुमार ने दोनों युवकों के परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद युवकों के एक रिश्तेदार, जो झारखंड पुलिस में दारोगा हैं, ने कथित IPS से फोन पर बातचीत की।

दारोगा से बातचीत के बाद खुलने लगा राज

दारोगा से बातचीत के दौरान कथित आरोपी को अपनी पहचान उजागर होने का अंदेशा हुआ। इसके बाद दोनों युवकों को कामा बिगहा जीटी रोड के पास उतार दिया गया और आरोपी स्कॉर्पियो लेकर फरार हो गया।

पीड़ित युवकों ने आरोप लगाया कि उन्हें मोबाइल फोन से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने डराने-धमकाने और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, कथित आरोपी ने नगर थाना के एक दारोगा को भी मोबाइल पर किसी से बातचीत करने से रोकने का प्रयास किया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थानों को अलर्ट कर दिया। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी स्कॉर्पियो से पलामू की ओर भाग रहा है।

चेकपोस्ट पर स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हुआ आरोपी

पुलिस ने संभावित रास्तों पर वाहनों की जांच शुरू की। एरका चेकपोस्ट के पास पुलिस की चेकिंग देखकर आरोपी स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हो गया।

पुलिस ने मौके से वाहन के चालक पिंटू कुमार, निवासी मेदिनीनगर, को पकड़ लिया। इसके बाद चैनपुर थाना क्षेत्र के कुंदन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो को भी बरामद कर लिया है।

पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मुख्य आरोपी तक पहुंचने और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने में लगी है।

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पटना के व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है स्कॉर्पियो

वाहन के पंजीकरण की जांच में स्कॉर्पियो के मालिक का नाम संजय कुमार मिश्रा बताया गया है। वह पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर निवासी बताए गए हैं।

पंजीकरण में दर्ज मोबाइल नंबर पर पुलिस ने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद मिला। दूसरी ओर, मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए औरंगाबाद पुलिस झारखंड में उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। मुख्य आरोपी की पहचान, उसके द्वारा पुलिस को कथित तौर पर प्रभावित करने के तरीके और इस घटनाक्रम में अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

केंदुआ-राजपूत बस्ती सड़क पर राज सिन्हा का 3 दिन का अल्टीमेटम, काम नहीं बढ़ा तो जोरदार आंदोलन की चेतावनी

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Dhanbad News: धनबाद और बोकारो को जोड़ने वाले केंदुआ–राजपूत बस्ती मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर धनबाद विधायक और झारखंड विधानसभा के सचेतक राज सिन्हा ने बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई है।

विधायक ने बीसीसीएल के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य में हो रही देरी पर सवाल उठाया है। उन्होंने प्रबंधन को तीन दिनों का अल्टीमेटम देते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।

राज सिन्हा के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के कारण आम लोगों, स्कूली बच्चों, राहगीरों, स्थानीय कारोबारियों और वाहन चालकों को परेशानी हो रही है।

एक महीने बाद भी काम की रफ्तार धीमी होने का दावा

विधायक ने कहा कि पहले आंदोलन और स्थानीय लोगों के दबाव के बाद सड़क की खुदाई कर मरम्मत का काम शुरू किया गया था। उनका दावा है कि करीब एक महीने बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा समेत कई महत्वपूर्ण पर्व सामने हैं। ऐसे में सड़क का काम पूरा नहीं होने से लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।

राज सिन्हा ने कहा कि इस सड़क को लेकर पहले भी कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें की गई हैं तथा आंदोलन भी किए गए हैं। उनके अनुसार, अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि मौके पर काम में तेजी दिखाई देनी चाहिए।

डीसी, एसएसपी और बीसीसीएल सीएमडी को भी भेजी पत्र की कॉपी

विधायक ने बीसीसीएल महाप्रबंधक को भेजे पत्र की प्रतियां धनबाद उपायुक्त, बीसीसीएल सीएमडी, वरीय पुलिस अधीक्षक और अनुमंडलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को भी दी हैं।

राज सिन्हा ने कहा कि केंदुआ–राजपूत बस्ती मुख्य मार्ग हजारों लोगों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीसीसीएल प्रबंधन से सड़क निर्माण में पर्याप्त संसाधन और मजदूर लगाने तथा काम की गति बढ़ाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जनता को लंबे समय तक धूल, गड्ढों और जाम की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए।

तीन दिन में काम तेज नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

राज सिन्हा ने कहा कि बीसीसीएल प्रबंधन को तीन दिनों के भीतर सड़क निर्माण कार्य को जोर-शोर से शुरू करना होगा और काम में तेजी लानी होगी। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

विधायक ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने बीसीसीएल की कोयला परिवहन व्यवस्था के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना कोयला परिवहन को निर्बाध रूप से जारी नहीं रखा जा सकता।

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कोयला लदी गाड़ियों को रोकने की चेतावनी

राज सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर सड़क निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो कोयला लदी गाड़ियों को रोकने का आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण कार्य की समीक्षा करने और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किया। विधायक ने निर्धारित समयसीमा के भीतर सड़क को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है।

फिलहाल बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से विधायक के अल्टीमेटम और लगाए गए आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में सामने नहीं आई है।

JPU में आइसा का हल्ला बोल, कुलपति का पुतला फूंका; तालाबंदी की चेतावनी

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छपरा: जयप्रकाश विश्वविद्यालय में कथित शैक्षणिक अव्यवस्था, कर्मचारियों की हड़ताल और छात्रों की समस्याओं को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने शनिवार को प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के कुलपति का पुतला दहन कर विरोध जताया और जमकर नारेबाजी की।

आइसा का आरोप है कि कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। इससे छात्रों को आवेदन जमा करने, फॉर्म सत्यापन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

10 सितंबर के आंदोलन में उठाई गई थीं छात्र हित की मांगें

JPU में आइसा का हल्ला बोल, कुलपति का पुतला फूंका; तालाबंदी की चेतावनी

आइसा के अनुसार, 10 सितंबर को जेपी विश्वविद्यालय में संगठन के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन किया गया था। इस दौरान छात्रों की कई समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने मांगें रखी गई थीं।

संगठन की प्रमुख मांगों में सत्र 2023-2027 के सेमेस्टर 1 से 4 तक के सभी छात्रों को मूल मार्क्सशीट जल्द जारी करना शामिल है। इसके अलावा छात्रों पर लागू 68 क्रेडिट सिस्टम को समाप्त करने की मांग भी की गई।

आइसा ने विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में हेल्प डेस्क शुरू करने और छात्रों से आवेदन प्राप्त करने के बाद उन्हें अनिवार्य रूप से लिखित रिसीविंग देने की मांग भी रखी है।

जेपीएम महिला कॉलेज की स्थिति को लेकर आइसा ने उठाए सवाल

JPU में आइसा का हल्ला बोल, कुलपति का पुतला फूंका; तालाबंदी की चेतावनी

आइसा नेताओं के मुताबिक, 10 सितंबर के आंदोलन के अगले दिन 11 सितंबर को संगठन की टीम ने जेपीएम महिला कॉलेज का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

संगठन का दावा है कि कॉलेज में कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। इसके कारण छात्रों के आवेदन जमा नहीं हो पा रहे थे और उन्हें रिसीविंग भी नहीं मिल रही थी।

आइसा के अनुसार, जिन छात्रों ने ऑनलाइन फॉर्म भर दिए थे, उनके फॉर्म का कॉलेज स्तर पर सत्यापन भी नहीं हो रहा था। संगठन ने आशंका जताई कि सत्यापन नहीं होने की स्थिति में छात्रों के फॉर्म रद्द होने का खतरा पैदा हो सकता है।

कुलपति के दावे पर आइसा ने उठाए सवाल

आइसा के जिला अध्यक्ष कुणाल कौशिक ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर के आंदोलन के दौरान आइसा प्रतिनिधिमंडल की कुलपति के साथ वार्ता हुई थी।

संगठन के अनुसार, वार्ता के दौरान कुलपति ने विभिन्न कॉलेजों में जाकर स्वयं स्थिति की जांच करने की बात कही थी। इसके बाद आइसा की टीम ने जेपीएम महिला कॉलेज का दौरा किया और संगठन का दावा है कि वहां की स्थिति कुलपति के दावे से अलग नजर आई।

आइसा ने इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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हेल्प डेस्क, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की मांग

आइसा के जिला सचिव विकास ने छात्र हित में तीन प्रमुख मुद्दे उठाए। इनमें सभी कॉलेजों में हेल्प डेस्क और आवेदन जमा करने पर लिखित पावती की व्यवस्था प्रमुख है।

इसके अलावा कॉलेजों में सुरक्षित पठन-पाठन का माहौल बनाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन ने पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, कॉमन रूम और कक्षाओं में उचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी।

आइसा ने चेतावनी दी है कि यदि सत्र 2023-2027 की मार्क्सशीट जारी करने, फॉर्म सत्यापन और हेल्प डेस्क शुरू करने जैसी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने पूरे विश्वविद्यालय में तालाबंदी करने की चेतावनी भी दी है।

सीतामढ़ी में बेखौफ अपराधियों का तांडव! सुबह टहलने निकले जिला पार्षद के पति की गोली मारकर हत्या

सीतामढ़ी: जिले में बेखौफ अपराधियों ने जिला परिषद सदस्य के पति की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना डुमरा थाना क्षेत्र के केथरिया की बताई जा रही है। मृतक की पहचान जिला परिषद क्षेत्र संख्या-13 की सदस्य खुश्दिल देवी के पति बैद्यनाथ महतो के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, बैद्यनाथ महतो शनिवार सुबह रोजाना की तरह टहलने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाकर फायरिंग कर दी। गोली लगने के बाद उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। हत्या की सूचना के बाद पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

ताबड़तोड़ फायरिंग से इलाके में फैली सनसनी

सीतामढ़ी में बेखौफ अपराधियों का तांडव! सुबह टहलने निकले जिला पार्षद के पति की गोली मारकर हत्या

 

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने बैद्यनाथ महतो पर अचानक फायरिंग की। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस घटना के कारणों और हमलावरों की पहचान का पता लगाने में जुटी है। आसपास के लोगों से भी पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वारदात के समय बैद्यनाथ महतो के साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे और हमलावर किस रास्ते से मौके पर पहुंचे और वहां से फरार हुए।

तीन दिन पहले जिला पार्षद के आवास पर कथित फायरिंग

सीतामढ़ी में बेखौफ अपराधियों का तांडव! सुबह टहलने निकले जिला पार्षद के पति की गोली मारकर हत्या

इस हत्या की घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि तीन दिन पहले जिला पार्षद के आवास पर कथित गोलीबारी को लेकर ग्रामीणों ने डुमरा थाना पहुंचकर प्रदर्शन किया था।

ग्रामीणों ने पुलिस से उस मामले में आरोपित लोगों की गिरफ्तारी की मांग की थी। बताया गया कि 28 अगस्त को जिला पार्षद के आवास पर कथित फायरिंग की घटना हुई थी। इसके बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की थी।

अब बैद्यनाथ महतो की हत्या के बाद स्थानीय लोगों के बीच पहले की घटना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

हत्या के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

बैद्यनाथ महतो की हत्या के बाद एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले की कथित फायरिंग के मामले में समय रहते कार्रवाई होती तो स्थिति को लेकर अलग तस्वीर हो सकती थी।

हालांकि, यह ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और आरोप हैं। पुलिस की ओर से हत्या के पीछे की वजह या 28 अगस्त की कथित फायरिंग से इस घटना के संबंध को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।

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पूर्व विधायक ने भी उठाए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

घटना को लेकर पूर्व विधायक सुनील कुशवाहा ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

फिलहाल सीतामढ़ी पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हत्या में शामिल आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है। घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है।

गयाजी पितृपक्ष मेले में सुरक्षा का बड़ा प्लान, 335 CCTV और ड्रोन से होगी निगरानी

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गया: गयाजी में इस वर्ष 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक पितृपक्ष मेला आयोजित किया जाएगा। लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

मेले के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को व्यवस्थित तरीके से बांटकर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है।

43 जोन और 314 सेक्टर में बांटा गया मेला क्षेत्र

पितृपक्ष मेले को 43 जोन और 314 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

श्रद्धालुओं की सहायता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 87 पुलिस शिविर बनाए जाएंगे। इन शिविरों में हेल्प डेस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता मिल सके।

विष्णुपद मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। यहां एक अस्थायी थाना भी बनाया जाएगा।

335 CCTV और ड्रोन से होगी निगरानी

मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए 335 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा ड्रोन, वॉच टावर और दूरबीन के माध्यम से भी मेला क्षेत्र की निगरानी की जाएगी।

प्रशासन का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को तत्काल सक्रिय करना है।

श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 674 स्थानों पर व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीमों की तैनाती की जाएगी।

यातायात के लिए 50 रिंग बस और 150 ई-रिक्शा

पितृपक्ष मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सार्वजनिक परिवहन की विशेष व्यवस्था की है।

श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 50 रिंग बस और 150 ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। इससे प्रमुख धार्मिक स्थलों और मेला क्षेत्र के बीच आवागमन आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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बच्चों की सुरक्षा के लिए QR कोड रिस्ट बैंड

भीड़ के दौरान बच्चों के बिछड़ने की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से QR कोड आधारित रिस्ट बैंड की व्यवस्था की गई है। इससे बच्चों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा मेला क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर LED स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। श्रद्धालुओं के मनोरंजन और आयोजन को आकर्षक बनाने के लिए लेजर शो की व्यवस्था भी की गई है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य पितृपक्ष मेले को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम बनाना है। सुरक्षा से लेकर यातायात, स्वास्थ्य, आवास और सूचना व्यवस्था तक विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।

46 थानों में नए थानेदार, 12 SHО लाइन हाजिर; पटना SSP ने बताया पुलिसिंग का नया तरीका

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Patna News: पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने अपराध गोष्ठी में जिले के सभी थाना प्रभारियों को बेहतर पुलिसिंग को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि थाने में आने वाले प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से सुना जाए और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में त्वरित कार्रवाई की जाए।

एसएसपी ने अधिकारियों से कहा कि FIR दर्ज करने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही मामलों की जांच वैज्ञानिक तरीके से करते हुए निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया गया।

सक्रिय अपराधियों की सूची बनाने और खुफिया तंत्र मजबूत करने पर जोर

46 थानों में नए थानेदार, 12 SHО लाइन हाजिर; पटना SSP ने बताया पुलिसिंग का नया तरीका

अपराध नियंत्रण को लेकर एसएसपी ने सभी थानों को अपने-अपने क्षेत्र के सक्रिय अपराधियों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही गुंडा पंजी को अपडेट करने और उस पर प्रभावी तरीके से काम करने को कहा गया।

उन्होंने थानों के खुफिया तंत्र को मजबूत करने के साथ नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में रोको-टोको अभियान को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।

एसएसपी ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ लंबित कार्रवाई में तेजी लाने की जरूरत है। इसके तहत वारंट, कुर्की और इश्तिहार के मामलों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।

46 थानों में नए थानाध्यक्ष, 12 एसएचओ लाइन हाजिर

पटना पुलिस में बेहतर पुलिसिंग की दिशा में किए गए बदलावों का भी बैठक में उल्लेख किया गया। इसी सुधार अभियान के तहत जिले के 46 थानों में नए थानाध्यक्ष नियुक्त किए जाने और 12 लापरवाह एसएचओ को लाइन हाजिर किए जाने की जानकारी दी गई।

पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ अपराध की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। थानों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही और सक्रियता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

नए आपराधिक कानूनों और ग्राम कचहरी पर ट्रेनिंग

थानेदारों को नए आपराधिक कानूनों की जानकारी देने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम कचहरी में सरपंच के अधिकारों और उनकी भूमिका को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी जा रही है।

पटना से आई विशेष टीमों की ओर से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छोटे स्तर के विवादों को ग्राम स्तर पर ही सुलझाने की व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि ऐसे मामलों में थानों पर अनावश्यक दबाव कम हो सके।

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आम लोगों का भरोसा बढ़ाना पुलिस की प्राथमिकता

अपराध गोष्ठी के दौरान पुलिसिंग में संवेदनशीलता और जवाबदेही को लेकर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पीड़ितों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और कानूनी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

पटना पुलिस का फोकस अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ आम लोगों में सुरक्षा की भावना और पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत करने पर है। नियमित गश्त, खुफिया तंत्र और लंबित कानूनी कार्रवाई में तेजी को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।