मैथन: DVC प्रोजेक्ट से प्रभावित विस्थापित परिवारों ने अपनी विभिन्न मांगों को मनवाने के लिए गुरुवार को मैथन (निरसा विधानसभा क्षेत्र) में प्रशासनिक भवन के सामने ‘वस्तुहारा संग्राम समिति’ के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि DVC प्रोजेक्ट से उनकी ज़मीन, घर और आजीविका पर असर पड़ा, लेकिन उन्हें अब तक उनके उचित अधिकार या न्याय नहीं मिला है।
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79 साल बाद भी अधिकारों से वंचित रहने का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए समिति के नेताओं ने बताया कि DVC की स्थापना के दौरान हज़ारों परिवारों को अपने पुश्तैनी घरों और ज़मीन को छोड़ना पड़ा था। उस समय विस्थापितों को रोज़गार, पुनर्वास, मुआवज़ा और अन्य सुविधाओं का भरोसा दिया गया था। समिति के नेताओं ने आरोप लगाया कि 79 साल बाद भी ज़्यादातर विस्थापित परिवार अपने अधिकारों से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियां बीत चुकी हैं, फिर भी विस्थापितों की समस्याएं हल नहीं हुई हैं।

आंदोलन और बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं
वक्ताओं ने बताया कि विस्थापितों की मांगों को लेकर सालों से आंदोलन, ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों के साथ बातचीत का दौर चला है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी निष्क्रियता के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि इस बार आंदोलन को निर्णायक लड़ाई के तौर पर लड़ा जाएगा और जब तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं हो जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

मुख्य मांगें: पुनर्वास, रोज़गार और मुआवज़ा
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में विस्थापित परिवारों का स्थायी पुनर्वास, योग्य आश्रितों को रोज़गार, बकाया मुआवज़े का भुगतान, ज़मीन के बदले उचित लाभ और विस्थापितों के अधिकारों की गारंटी शामिल है। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने सरकार और DVC प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और अपनी शिकायतों के तत्काल समाधान की मांग की।
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मांगों पर विचार न होने पर आंदोलन और तेज़ होगा
समिति के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ और व्यापक बनाया जाएगा। विस्थापितों का कहना है कि दशकों तक उपेक्षा और टूटे हुए वादों का सामना करने के बाद, अब उनके पास आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार उनकी आवाज़ संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुँचेगी और उनके मुद्दों का समाधान होगा, जिससे उन्हें न्याय मिल सकेगा।






















