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Friday, August 21, 2026

Shibu Soren Padma Bhushan: जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने वाले शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण


Shibu Soren Padma Bhushan: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी अधिकारों की आवाज रहे दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन को मंगलवार, 23 जून 2026 को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर उनकी बहू और झारखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहीं कल्पना सोरेन भी मौजूद रहेंगी।

जानकारी के अनुसार रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन सोमवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गई थीं। इससे पहले यह चर्चा थी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता को मिलने वाला यह सम्मान ग्रहण करेंगे, लेकिन झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि परिवार की ओर से रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन समारोह में शामिल होकर सम्मान ग्रहण करेंगी।

सार्वजनिक जीवन और झारखंड आंदोलन में अहम योगदान

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का नाम झारखंड आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने आदिवासियों के अधिकार, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए दशकों तक संघर्ष किया। उनके नेतृत्व ने न केवल आदिवासी समाज को राजनीतिक पहचान दिलाई, बल्कि झारखंड राज्य निर्माण के आंदोलन को भी नई दिशा प्रदान की।

राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन ने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे कई बार सांसद रहे और झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता और संघर्षशील छवि ने उन्हें राज्य की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुई थी घोषणा

गृह मंत्रालय ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की सूची जारी करते हुए शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण देने की घोषणा की थी। सरकार ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह सम्मान देने का निर्णय लिया था।

झारखंड के लिए गर्व का अवसर

शिबू सोरेन को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना झारखंड के लिए गर्व और सम्मान का क्षण माना जा रहा है। राज्यभर में उनके समर्थकों, झामुमो कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के बीच इस सम्मान को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यह सम्मान केवल शिबू सोरेन को नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष को भी समर्पित है, जिसने झारखंड को अलग राज्य के रूप में पहचान दिलाई।

गौरतलब है कि शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद हुआ था। उनके निधन के बाद भी उनके संघर्ष, विचार और योगदान झारखंड की राजनीति और समाज में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। पद्मभूषण सम्मान उनके जीवनभर के संघर्ष और देश के प्रति समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

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