New SIM binding rule: केंद्र सरकार ने SIM बाइंडिंग नियमों को लागू करने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह सिस्टम साइबर धोखाधड़ी को रोकने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। नए नियम लागू होने के बाद, मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव दिख सकते हैं।
Highlights:
SIM बाइंडिंग क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
SIM बाइंडिंग एक सुरक्षा तरीका है जो मैसेजिंग ऐप को यूज़र के मोबाइल फ़ोन में मौजूद रजिस्टर्ड SIM कार्ड से जोड़ता है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि खास नंबर का इस्तेमाल सिर्फ़ उसी डिवाइस पर हो जिसमें अधिकृत SIM लगा हो। इस उपाय का मकसद अनधिकृत लॉगिन और साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है।
इसका यूज़र्स पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर नियम लागू होते हैं, तो यूज़र्स को यह पक्का करना होगा कि उनके मैसेजिंग अकाउंट से जुड़ा SIM कार्ड उसी फ़ोन में रहे जिसका वे इस्तेमाल कर रहे हैं। SIM निकालने या उसे किसी दूसरे डिवाइस में डालने से कुछ सेवाओं के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंप्यूटर या दूसरे डिवाइस पर लॉग-इन अकाउंट्स के संचालन से जुड़े नियम भी लागू किए जा सकते हैं।
सरकार और टेक इंडस्ट्री का क्या रुख है?
केंद्रीय संचार मंत्रालय का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर अपराधों को रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है। दूसरी ओर, डिजिटल इंडस्ट्री की कुछ संस्थाओं ने इस सिस्टम के व्यावहारिक असर को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे कई पेशेवर यूज़र्स और एक से ज़्यादा डिवाइस इस्तेमाल करने वालों को परेशानी हो सकती है।
मंत्री ने Starlink और BSNL से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी
सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink के बारे में, संचार मंत्री ने कहा कि कंपनी को सुरक्षा मानकों से जुड़े ज़रूरी टेस्ट पूरे करने होंगे। इसके अलावा, BSNL में एक प्रशासनिक मामले को लेकर एक अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्री ने यह भी बताया कि BSNL की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है और कंपनी बेहतर कैश फ़्लो की ओर बढ़ रही है।






















