नई दिल्ली: Gen Z को डिजिटल दुनिया में सबसे ज्यादा सहज पीढ़ियों में गिना जाता है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस्तेमाल में आगे रहने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा पेशेवर वास्तविक दुनिया में प्रोफेशनल नेटवर्क बनाने से बच रहे हैं।
Highlights:
LinkedIn की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 83 फीसदी Gen Z प्रोफेशनल नेटवर्किंग करने से कतराते हैं। यानी करियर में मदद कर सकने वाले लोगों से संपर्क करने, सलाह मांगने या नए अवसरों के लिए बातचीत शुरू करने में बड़ी संख्या में युवा झिझक महसूस करते हैं।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि समस्या नेटवर्किंग की अहमियत समझने की नहीं, बल्कि पहला कदम उठाने की है।
79% युवा मानते हैं नेटवर्किंग जरूरी, फिर भी बातचीत शुरू करना मुश्किल
रिपोर्ट के मुताबिक 79 फीसदी युवा पेशेवर मानते हैं कि करियर में मजबूत पेशेवर रिश्तों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद 52 फीसदी लोगों को यह समझ नहीं आता कि किसी से बातचीत की शुरुआत कैसे की जाए।
इस झिझक के पीछे प्रशिक्षण की कमी भी एक वजह बताई गई है। करीब 59 फीसदी Gen Z पेशेवरों का कहना है कि उन्हें किसी ने यह नहीं सिखाया कि पेशेवर संबंध कैसे बनाए जाते हैं।
ऐसे में युवा अक्सर यह तय नहीं कर पाते कि किस व्यक्ति से संपर्क करना चाहिए, सही समय क्या है और बातचीत किस तरह शुरू की जाए।
गलत आंके जाने का डर सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल
नेटवर्किंग से पीछे हटने की कई वजहें रिपोर्ट में सामने आई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है दूसरों द्वारा गलत आंके जाने की चिंता।
आंकड़ों के मुताबिक:
- 44% Gen Z को डर रहता है कि लोग उन्हें गलत समझ सकते हैं।
- 39% को लगता है कि किसी से संपर्क करके वे उसे बेवजह परेशान कर रहे हैं।
- 37% युवा इस चिंता में रहते हैं कि उनकी बातचीत बनावटी लग सकती है।
यही आशंकाएं कई युवाओं को उन लोगों तक पहुंचने से रोकती हैं, जिनसे उन्हें करियर की दिशा, नौकरी या पेशेवर सलाह मिल सकती है।
जान-पहचान से नौकरी मिलने की संभावना ज्यादा
नेटवर्किंग का फायदा केवल सलाह लेने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन युवाओं की संबंधित कंपनी के भीतर जान-पहचान होती है, उनके नौकरी पाने की संभावना ऐसे लोगों की तुलना में 8.5 गुना अधिक बताई गई है, जिनकी कंपनी में कोई पेशेवर संपर्क नहीं है।
यानी सही व्यक्ति से बना एक पेशेवर रिश्ता नौकरी के अवसर तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। लेकिन मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की कमी के कारण कई युवा इस लाभ का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
छोटी बातचीत से बनता है बड़ा प्रोफेशनल नेटवर्क
नेटवर्किंग को केवल अनजान लोगों को संदेश भेजने या नौकरी मांगने तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। LinkedIn की करियर एक्सपर्ट निराजिता बनर्जी के मुताबिक, समय के साथ होने वाली छोटी-छोटी बातचीत भरोसा बनाने में मदद करती है।
ऐसे संबंध धीरे-धीरे पेशेवर दायरा बढ़ाते हैं और व्यक्ति को नई जानकारी, अवसर तथा जरूरत के समय मदद हासिल करने में सहायता कर सकते हैं।
रिपोर्ट का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि पुरानी पीढ़ियों में मदद करने की इच्छा अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देती है। आंकड़ों के अनुसार 92% Millennials और 95% Gen X किसी अनजान व्यक्ति की भी मदद करने के लिए तैयार रहने की बात सामने आई है।
ऐसे में Gen Z के सामने चुनौती यह नहीं है कि लोग उनकी मदद नहीं करना चाहते, बल्कि यह है कि वे मदद मांगने के लिए पहला कदम कितनी सहजता से उठा पाते हैं।
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करियर में नेटवर्किंग को बोझ नहीं, अवसर मानना जरूरी
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि युवा पेशेवर नेटवर्किंग की उपयोगिता को समझते हैं, लेकिन सामाजिक और पेशेवर झिझक उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है।
किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेना, किसी पुराने संपर्क से हालचाल पूछना या किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ से जानकारी मांगना हमेशा सीधे नौकरी मांगने जैसा नहीं होता। धीरे-धीरे बने ऐसे संपर्क भविष्य में करियर के नए रास्ते खोल सकते हैं।
Gen Z के लिए इसलिए जरूरी है कि नेटवर्किंग को दबाव या दिखावे के बजाय पेशेवर संबंध बनाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाए। छोटी बातचीत से शुरू हुआ संपर्क आगे चलकर करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर में बदल सकता है।






















