क्रीम बेल केसर बादाम पीते ही आंखों में जलन और पेट दर्द, उपभोक्ता ने मिलावट का लगाया आरोप
Cream Bell Kesar Badam Complaint: बैंक मोड़ इलाके में पैक्ड पेय पदार्थ के सेवन के बाद एक उपभोक्ता की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। शास्त्री नगर निवासी विश्वजीत कुमार ने आरोप लगाया है कि 17 सितंबर की रात उन्होंने बैंक मोड़ स्थित एक दुकान से क्रीम बेल का केसर बादाम लिक्विड खरीदा था। घर पहुंचकर पेय पदार्थ का सेवन करते ही उनकी आंखों में जलन और पेट में दर्द होने लगा। तबीयत बिगड़ने के बाद विश्वजीत कुमार इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचे। उनका दावा है कि डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी। हालांकि, पेय पदार्थ में वास्तव में किसी जहरीले या हानिकारक पदार्थ की मौजूदगी थी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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पहला घूंट पीते ही महसूस हुई परेशानी

विश्वजीत कुमार के अनुसार, उन्होंने विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर की रात करीब 10 बजे बैंक मोड़ की एक दुकान से क्रीम बेल का केसर बादाम लिक्विड खरीदा था। घर पहुंचने के बाद जैसे ही उन्होंने पेय पदार्थ का सेवन किया, पहले ही घूंट के बाद उन्हें असहज महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि कुछ ही देर में आंखों में जलन और पेट में दर्द की शिकायत होने लगी। इसके बाद उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हुआ। शंका होने पर उन्होंने बचे हुए पेय पदार्थ को सुरक्षित रखा और चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए अस्पताल पहुंचे।
निजी अस्पताल में भर्ती होने की दी गई सलाह

उपभोक्ता का कहना है कि वह अपने साथ बचा हुआ पेय पदार्थ लेकर पाटलिपुत्र स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उत्पाद को देखने के बाद उन्हें भर्ती होने की सलाह दी। विश्वजीत के मुताबिक, डॉक्टरों ने कथित तौर पर पेय पदार्थ में कीटनाशक जैसे किसी जहरीले तत्व की आशंका जताई। हालांकि, यह डॉक्टरों की कथित आशंका है। इसकी पुष्टि के लिए उत्पाद के नमूने की वैज्ञानिक जांच आवश्यक होगी। उन्होंने बताया कि करीब 24 घंटे अस्पताल में रहने के बाद 18 सितंबर को उन्हें छुट्टी दे दी गई।
कंपनी को ई-मेल के जरिए भेजी शिकायत
विश्वजीत कुमार ने इस मामले की शिकायत क्रीम बेल कंपनी को ई-मेल के माध्यम से भेजने की बात कही है। उनका कहना है कि उत्पाद की एक्सपायरी डेट भी समाप्त नहीं हुई थी। ऐसे में उन्होंने उत्पाद की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता की शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इस मामले में क्या जवाब देती है और उत्पाद के संबंधित बैच की जांच कराती है या नहीं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर
यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पैक्ड पेय पदार्थों का सेवन बच्चे, युवा और आम उपभोक्ता करते हैं। यदि किसी खाद्य या पेय उत्पाद में मिलावट अथवा हानिकारक पदार्थ की पुष्टि होती है, तो निर्माण, आपूर्ति और बिक्री से जुड़े स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग की संभावित कार्रवाई को लेकर है। क्या विभाग उत्पाद का नमूना लेकर प्रयोगशाला में जांच कराएगा? क्या संबंधित दुकान और कंपनी से जवाब मांगा जाएगा? और यदि जांच में मिलावट की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? हालांकि, अभी तक उत्पाद में कीटनाशक या किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति खाद्य सुरक्षा जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




















