Dhanbad Baramundi Khatal Rehabilitation: बरमुंडी स्थित खटाल को खाली कराने और जमीन की मापी की कार्रवाई से चिंतित सैकड़ों खटालवासी शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए मांग की कि किसी भी तरह की बेदखली से पहले उनके लिए पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। खटालवासियों का दावा है कि वर्ष 2005 के आसपास तत्कालीन जिला प्रशासन ने उन्हें बेकारबांध तालाब के पास से हटाकर बरमुंडी में बसाया था। अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई की आशंका के बीच करीब 200 परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
Highlights:
बेकारबांध से बरमुंडी बसाए जाने का दावा
प्रभावित परिवारों के मुताबिक, करीब 21 वर्ष पहले उन्हें बेकारबांध तालाब के पास से हटाकर बरमुंडी में रहने के लिए जगह दी गई थी। उस समय इलाके में जंगल जैसा माहौल था। परिवारों ने अपनी मेहनत से झोपड़ियां बनाईं और धीरे-धीरे यहां रहना शुरू किया। खटालवासियों का कहना है कि समय के साथ इलाके का शहरीकरण हुआ और आसपास बड़े शोरूम तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो गए। अब प्रशासन द्वारा जमीन की मापी और खटाल खाली कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने से उन्हें दोबारा विस्थापित होने की चिंता सता रही है।
200 परिवारों के सामने आवास और रोजगार का संकट
प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन उनसे पक्के मकान हटाने और खटाल खाली करने को कह रहा है। उनका दावा है कि तत्कालीन उपायुक्त के समय से जुड़े आवंटन और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज उनके पास हैं या उन्हें उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वे इन कागजातों के आधार पर अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। खटालवासियों के अनुसार, उनका जीवन घरों के साथ पशुपालन और दूध के कारोबार से भी जुड़ा है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाए जाने पर उनके सामने रहने की जगह के साथ आजीविका का संकट भी खड़ा हो सकता है।
पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई की मांग
उपायुक्त कार्यालय पहुंचे प्रभावित परिवारों ने मांग की कि यदि प्रशासन जमीन खाली कराना चाहता है, तो पहले सभी करीब 200 परिवारों के लिए आवास या कॉलोनी के रूप में उचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई निष्पक्ष हो और इसमें केवल गरीब परिवारों को ही निशाना नहीं बनाया जाए। खटालवासियों का कहना है कि आसपास की सरकारी जमीन पर हुए अन्य अतिक्रमणों के मामले में भी समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंदोलन और धनबाद बंद की चेतावनी
खटालवासियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने उठाएंगे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने और धनबाद बंद का आह्वान करने को मजबूर होंगे। फिलहाल प्रभावित परिवारों की मुख्य मांग पुनर्वास सुनिश्चित करने की है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन उनके दावों और दस्तावेजों पर किस तरह विचार करता है तथा आगे की कार्रवाई से पहले पुनर्वास को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।






















