Nishikant Dubey Russia Invitation, देवघर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नयी दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के समापन के बाद भारत और रूस के संसदीय संबंधों को लेकर अहम पहल सामने आयी है। सम्मेलन में शामिल होने के बाद रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदीन को पालम हवाई अड्डे पर गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने विदाई दी। इस दौरान रूसी ड्यूमा अध्यक्ष ने डॉ. दुबे को रूस-भारत मैत्री समूह संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में रूस आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। इस निमंत्रण को दोनों देशों की संसदों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसदीय स्तर पर नियमित संपर्क से विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के अनुभव साझा करने और आपसी संबंधों को मजबूत करने के अवसर मिल सकते हैं।
Highlights:
ब्रिक्स सम्मेलन में जन-केंद्रित विकास और एआइ पर चर्चा
26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), डिजिटल तकनीक, आतंकवाद और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। सम्मेलन के समापन पर संयुक्त घोषणा स्वीकार की गयी। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने तथा सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही जिम्मेदार तकनीकी उपयोग, पारदर्शी संसदीय व्यवस्था और सतत विकास को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
ओम बिरला और व्याचेस्लाव वोलोदीन के बीच द्विपक्षीय वार्ता
सम्मेलन से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदीन के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। इसमें दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा की गयी। बैठक में युवा और महिला सांसदों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने, विधायी प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभव साझा करने तथा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का उद्देश्य संसदीय संपर्क को अधिक नियमित और प्रभावी बनाना रहा।
रूस-भारत मैत्री समूह समिति के जरिए बढ़ेगा संवाद
रूस-भारत मैत्री समूह संसदीय समिति दोनों देशों की संसदों के बीच संस्थागत संवाद को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकती है। डॉ. निशिकांत दुबे को रूस आने का निमंत्रण इसी संसदीय संपर्क को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। समिति के माध्यम से भारतीय और रूसी सांसदों के बीच बैठकें, प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान और विधायी अनुभव साझा करने जैसे प्रयासों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे दोनों देशों की संसदों को साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।
आतंकवाद, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक जैसे विषयों पर सहयोग की संभावना
भारत और रूस के संसदीय संवाद में आतंकवाद, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, कृषि, विज्ञान-तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की संभावनाएं हैं। संसदीय स्तर पर संवाद बढ़ने से इन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान और सहयोग के रास्ते तलाशने में मदद मिल सकती है। ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों और विकासशील देशों की भूमिका पर हुई चर्चा के बीच रूस का यह निमंत्रण भारत-रूस संसदीय संबंधों को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, रूस यात्रा की तारीख और कार्यक्रम के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विवरण नहीं दिया गया है।






















