अब जीविका दीदियों का खुद का होगा बैंक – ‘जीविका निधि’
पटना, 20 मई 2025 — ‘जीविका निधि’ बिहार सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य की लाखों जीविका दीदियों को न केवल अपना बैंक मिलेगा, बल्कि सस्ता ऋण, आसान वित्तीय लेन-देन और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खुलेगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘जीविका निधि’ की स्थापना को स्वीकृति दी गई है।
Highlights:
‘मेरा बैंक – मेरी शक्ति’: महिलाओं के हाथों में बैंकिंग की बागडोर
‘जीविका निधि’ के रूप में राज्य की महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को अब अपनी स्वयं की वित्तीय संस्था मिलेगी। इस क्रेडिट कोऑपरेटिव बैंक का गठन बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड के रूप में किया जाएगा, जिसका पंजीकरण बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 के तहत होगा। इस बैंक के माध्यम से महिलाएं किफायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकेंगी और अपने छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ा सकेंगी।

राज्यस्तरीय योजना, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
‘जीविका निधि’ की परिकल्पना राज्यस्तर पर की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली हजारों महिलाएं और उनके परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। बैंक का उद्देश्य SHG सदस्यों को 12% वार्षिक ब्याज दर पर पूंजी ऋण देना है, जिससे वे स्थानीय साहूकारों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ऊँची ब्याज दरों से बच सकें। साथ ही बैंकों से ऋण लेने में होने वाली देरी भी खत्म होगी।
महिलाएं ही करेंगी बैंक का संचालन
इस संस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका संचालन महिलाएं स्वयं करेंगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई ऊर्जा मिलेगी। बैंक के माध्यम से ऋण, बचत, बीमा जैसी सेवाएं दी जाएंगी। सदस्यों की व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार ऋण योजनाएं तैयार की जाएंगी और समय पर बड़े ऋण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
1,000 करोड़ रुपये के निवेश से बनेगा ‘जीविका निधि’
इस बैंक की स्थापना और संचालन के लिए कुल 1,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है:
- राज्य सरकार से 500 करोड़ रुपये अनुदान स्वरूप
- 400 करोड़ रुपये की शेयर पूंजी जीविका की प्राथमिक समितियों से
- 100 करोड़ रुपये सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली के लिए
- 110 करोड़ रुपये की राशि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से
प्रत्येक क्लस्टर लेवल कमिटी को 10 लाख रुपये की दीर्घकालिक जमा राशि दी जाएगी। साथ ही, ‘जीविका निधि’ अन्य वित्तीय संस्थानों जैसे बैंक, नाबार्ड, LIC, SIDBI से ऋण लेने पर राज्य सरकार गारंटी प्रदान करेगी।
यह भी पढ़ें : अवैध कोयला तस्करी पर बड़ी कार्रवाई: BCCL, CISF और पुलिस की संयुक्त छापेमारी, अवैध माइंस की गई बंद
संचालन का ढांचा और पारदर्शिता
‘जीविका निधि’ का संचालन आम निकाय, प्रतिनिधि निकाय, प्रबंधन समिति और पदाधिकारियों के सहयोग से किया जाएगा। संचालन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया बिहार सहकारी समिति अधिनियम, 1935 के अंतर्गत तय नियमों के अनुसार होगी।
‘जीविका निधि’ बिहार सरकार की ओर से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इससे न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लाखों जीविका दीदियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती भी मिलेगी। यह बैंक महिलाओं के लिए न केवल एक वित्तीय सहायता का साधन होगा, बल्कि यह उनके आत्मविश्वास, सामाजिक पहचान और सशक्तिकरण की नई उड़ान बनेगा।






















