धनबाद: नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। यह दिवाली से एक दिन पहले कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
Highlights:
महत्व और मान्यता
- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर 16,000 कन्याओं को मुक्त किया था।
- इस दिन यमराज को दीपदान करने से अकाल मृत्यु और नरक दोष से मुक्ति मिलती है।
- हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
शुभ मुहूर्त
- यम दीपदान :
19 अक्टूबर — शाम 5:50 बजे से 7:02 बजे तक
घर के दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। - अभ्यंग स्नान :
20 अक्टूबर — सुबह 5:13 बजे से 6:25 बजे तक
स्नान से पहले तिल या सरसों के तेल में हल्दी व तिल मिलाकर पूरे शरीर की मालिश करें।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान (अभ्यंग स्नान) करें।
- भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी, हनुमान जी और यमराज की पूजा करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शाम को घर की सभी लाइटें बंद कर, एक दीपक जलाएं और उसे दक्षिण दिशा में बाहर रख दें — इसे “यमदीप” कहते हैं।
- दीपदान के समय मन में प्रार्थना करें कि यमराज हमारे पापों को क्षमा करें और जीवन में सुख-शांति दें।
पौराणिक कथा सारांश
- नरकासुर नामक राक्षस ने 16,000 कन्याओं को बंदी बना रखा था।
- भगवान कृष्ण ने माता सत्यभामा की सहायता से उसका वध किया।
- इसी विजय की स्मृति में यह दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।





















