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Saturday, June 6, 2026

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर डालसा द्वारा लगाया गया जागरूकता शिविर

डालसा द्वारा आयोजित जागरूकता अभियान – “नशा मुक्त हो प्रदेश हमारा” की गूंज से जागा बलियापुर, ग्रामीणों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, डालसा  द्वारा बलियापुर प्रखंड में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नशे के दुष्परिणामों, विधिक योजनाओं और अनाथ बच्चों के लिए लाभकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

धनबाद, झारखंड – 31 मई, 2025:

हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सके। इसी क्रम में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार धनबाद (डालसा) ने बलियापुर प्रखंड के बैलगाड़िया कॉलोनी में एक व्यापक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य ग्रामीणों को तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना था।

बलियापुर के डालसा के माननीय सचिव के आदेशानुसार आयोजित इस शिविर में गांव के ग्रामीणों के बीच नशामुक्ति का संदेश दिया गया। अधिकार मित्रों ने तंबाकू और अन्य नशों के कारण होने वाली शारीरिक और मानसिक बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने नशे की लत से परिवारों और समाज पर पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला।

इस शिविर के दौरान, ग्रामीणों ने “नशा मुक्त हो प्रदेश हमारा” के नारों के साथ नशामुक्ति का संकल्प लिया। यह संकल्प न केवल इस क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए नशा मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

शिविर में दी गई जानकारियाँ और कार्यवाहियां

नशे के दुष्प्रभावों की समझ:

अधिकार मित्रों ने तंबाकू सेवन, धूम्रपान और अन्य नशे के प्रकारों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को स्पष्ट किया। बताया गया कि तंबाकू के कारण फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, सांस की बीमारियाँ और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अतिरिक्त, नशे की लत व्यक्ति की सामाजिक स्थिति, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों को भी खराब कर देती है।

साथी परियोजना के तहत अनाथ बच्चों का सर्वेक्षण:

डालसा द्वारा चलाए जा रहे “साथी परियोजना” के अंतर्गत अनाथ बच्चों का सर्वे किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान बच्चों को मिलने वाले लाभों जैसे वात्सल्य योजना, स्पॉन्सरशिप, बाल संरक्षण और शैक्षणिक सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस पहल से बच्चों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने में मदद मिलेगी और वे सुरक्षित व समर्थ भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।

विधिक जागरूकता:

ग्रामीणों को डालसा द्वारा विधिक अधिकारों और कानूनी सहायता की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि किसी भी प्रकार के विवाद, मोटर दुर्घटना, बाल श्रम, बाल विवाह आदि के मामलों में वे मुफ्त अधिवक्ता की सहायता ले सकते हैं। इस तरह की विधिक जागरूकता ग्रामीणों को अपने अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम बनाएगी।

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ग्रामीण समाज के लिए महत्व

यह  डालसा द्वारा आयोजित जागरूकता शिविर ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में नशा और उससे जुड़े सामाजिक कुप्रथाओं के प्रति जागरूकता की कमी होती है। ऐसी स्थितियों में यह कार्यक्रम न केवल नशे के दुष्प्रभावों को उजागर करता है बल्कि ग्रामीणों को समाज के कल्याण के लिए सरकारी योजनाओं और विधिक सहायता की जानकारी भी प्रदान करता है।

शिविर में उपस्थित अधिकार मित्रों और ग्रामीणों के बीच संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि नशा मुक्ति सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की जिम्मेदारी है। यदि पूरे समाज को जागरूक किया जाए, तो नशा जैसी सामाजिक बुराइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

शिविर में शामिल प्रमुख सदस्य

इस आयोजन में विशेष रूप से उपस्थित थे:

  • एजाज अहमद (अधिकार मित्र)

  • दीपेंटी गुप्ता

  • जगदीश रजक

  • उमाशंकर मंडल

  • हेमराज चौहान

  • आनंद चक्रवर्ती

  • संतोष कुमार सिंह

  • तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणजन

इन सभी ने मिलकर इस शिविर को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

डालसा की सामाजिक भूमिका

डालसा का यह प्रयास सामाजिक न्याय और विधिक सहायता के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता फैलाकर वे समाज के कमजोर वर्गों को उनकी कानूनी पहुँच तक पहुंचा रहे हैं। नशा मुक्ति अभियान के साथ-साथ बाल संरक्षण, बाल श्रम निषेध, बाल विवाह रोकथाम जैसी सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी डालसा काम कर रहा है।

इस तरह के शिविर ग्रामीणों को न केवल जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाते हैं ताकि वे अपने अधिकारों के लिए स्वयं खड़े हो सकें और अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें।

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