धनबाद: चैती छठ महापर्व के दूसरे दिन “खरना” का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में यह पावन अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जा रहा है। खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं।
खरना की पूजा अत्यंत शुद्धता और पवित्रता के साथ की जाती है। इस दिन व्रती महिलाएं और पुरुष घर को साफ-सुथरा कर पूजा स्थल तैयार करते हैं। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी या उपले से प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर (रसीया), रोटी और केला शामिल होता है।
सूर्यास्त के समय व्रती भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करते हैं। इसके बाद प्रसाद का भोग लगाया जाता है और परिवार तथा आसपास के लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाता है। खरना के प्रसाद को अत्यंत पवित्र माना जाता है।
इस अनुष्ठान के साथ ही व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प लेते हैं, जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण होता है।
चैती छठ का यह पर्व प्रकृति, सूर्य उपासना और लोक आस्था का अद्भुत संगम है, जो लोगों को अनुशासन, श्रद्धा और स्वच्छता का संदेश देता है।






















