Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए वोटिंग खत्म होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही INDIA ब्लॉक और NDA, दोनों ही अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। अब सबकी नज़रें नतीजों पर टिकी हैं, लेकिन उससे पहले चुनावी गणित और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है।
Highlights:
RJD और CPI(ML) के छह विधायक बने चर्चा का केंद्र
पूरे चुनावी समीकरण में, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चार और CPI(ML) (जिसे अक्सर ‘माले’ कहा जाता है) के दो विधायक अहम माने जा रहे हैं। छह विधायकों का यह समूह दोनों सीटों के नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा में थोड़ा सा भी बदलाव चुनावी नतीजों पर असर डाल सकता है।
INDIA ब्लॉक को 56 विधायकों का समर्थन
झारखंड विधानसभा में INDIA ब्लॉक को 56 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसमें JMM के 34, कांग्रेस के 16, RJD के 4 और CPI(ML) के 2 विधायक शामिल हैं। इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार उतारे हैं और दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है।
कांग्रेस का दावा: प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट
कांग्रेस विधायक राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया है कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 28.97 वोट मिलेंगे। उनका कहना है कि दूसरी पसंद के वोटों और वोट-ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर कांग्रेस की जीत पक्की है।
NDA को 24 विधायकों का समर्थन
वहीं, NDA के पास कुल 24 वोट हैं, जिनमें BJP के 21 विधायक और AJSU, JD(U) व LJP का एक-एक विधायक शामिल है। इस खेमे की पूरी ताकत NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के साथ है। कम संख्या होने के बावजूद, NDA नेताओं का दावा है कि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में भी जा सकते हैं।
क्रॉस-वोटिंग और ‘अंतरात्मा की आवाज़’ पर चर्चा
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग की संभावना और ‘अंतरात्मा की आवाज़’ जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने विधायकों पर कड़ी नज़र रख रही हैं। पार्टी एजेंटों की भूमिका भी बहुत अहम मानी जा रही है, क्योंकि वोटिंग प्रोसेस से जुड़ी जानकारी सीधे टॉप लीडरशिप तक पहुँच रही है।
नेताओं की बॉडी लैंग्वेज पर नज़र
वोटिंग के बाद नेताओं का बर्ताव और उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है। जहाँ कुछ जगहों पर कॉन्फिडेंस साफ़ दिख रहा था, वहीं कुछ अन्य जगहों पर हल्की बेचैनी के संकेत भी नज़र आए। अब सबकी नज़रें वोटों की गिनती पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि अलग-अलग दावों के पीछे का गणित सही साबित होता है या झारखंड की राजनीति कोई नया मोड़ लेती है।






















