457 करोड़ की कथित विदेशी रेमिटेंस की जांच करेगी SIT
Gaurav Gunjan EOU SIT: चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन से जुड़े करीब 457 करोड़ रुपये की कथित अवैध विदेशी रेमिटेंस के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। EOU के एडीजी अमित कुमार जैन ने SIT गठित की है और इसकी जिम्मेदारी DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों को सौंपी गई है। अब टीम इस मामले में विदेशी रकम के ट्रांसफर के साथ-साथ उससे जुड़े दस्तावेज, कंपनियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
Highlights:
Form 15CB प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर सवाल
मामले में गौरव गुंजन की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। आरोप है कि उन्होंने विदेश रकम भेजने के लिए जरूरी Form 15CB से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए थे। ऐसे मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट को भुगतान की प्रकृति, संबंधित पक्षों के दस्तावेज और टैक्स से जुड़े जरूरी पहलुओं की जांच करनी होती है। EOU अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने से पहले जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि जिन कंपनियों के नाम पर विदेश में रकम भेजी गई, उनका वास्तविक कारोबार था या नहीं। इनमें कुछ कंपनियों के कथित तौर पर शेल कंपनी होने की आशंका और उनकी घोषित आय तथा विदेश भेजी गई रकम के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है।
आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद सामने आया मामला
इस मामले की शुरुआत आयकर विभाग के देशव्यापी सत्यापन अभियान से हुई थी। इस अभियान के दौरान अलग-अलग शहरों की 394 व्यावसायिक इकाइयों और 36 वित्तीय पेशेवरों की जांच की गई। इसी प्रक्रिया में गौरव गुंजन से जुड़ी गतिविधियां जांच के दायरे में आईं। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को पटना स्थित उनके ठिकाने पर आयकर विभाग ने तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। बाद में आयकर विभाग के सहायक निदेशक प्रिंस बाबू मिश्रा की शिकायत के आधार पर 10 सितंबर को EOU थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। FIR में गलत जानकारी देने, कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश और अवैध तरीके से रकम विदेश भेजने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
SIT जांच में किन लोगों और कंपनियों की भूमिका सामने आएगी?
SIT की जांच केवल गौरव गुंजन की भूमिका तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संबंधित कंपनियों का वास्तविक कारोबार क्या था और विदेश में भेजी गई रकम का लाभार्थी कौन था। इसके अलावा दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए, Form 15CB के प्रमाणपत्र किन आधारों पर जारी किए गए और रकम विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी जांच की जाएगी। जांच के दौरान कंपनियों की वास्तविकता, उनके वित्तीय रिकॉर्ड और घोषित आय की तुलना विदेश भेजी गई रकम से किए जाने की संभावना है। इससे कथित रेमिटेंस नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाने में मदद मिल सकती है।
यह भी पढ़ें: UPI Transaction Charge: UPI MDR क्या है? ₹2,000 की सीमा के बाद ग्राहकों और दुकानदारों पर क्या पड़ेगा असर
457 करोड़ की रकम के पीछे पूरे नेटवर्क की तलाश
EOU की SIT अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इतनी बड़ी रकम विदेश भेजने की प्रक्रिया किस तरह संचालित हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। गौरव गुंजन या अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अदालत में साबित होना बाकी है। SIT की जांच पूरी होने के बाद ही मामले में शामिल लोगों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।






















