Raju Singh Harsh Firing Case: हजारीबाग ज़िले के बरकागांव इलाके में लुरुंगा में कथित तौर पर अवैध कोयला खदान के ढहने से दो मज़दूरों की मौत की खबर सामने आई है। स्थानीय सूत्रों ने मृतकों की पहचान शिबू बेदिया और सुखदेव गंझू के तौर पर की है; हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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लाशों को चुपके से ठिकाने लगाने की चर्चा
स्थानीय लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि हादसे के बाद मामले को दबाने और लाशों को चुपके से ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन ने घटना के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
अधिकार क्षेत्र को लेकर उलझन
घटना के बारे में पूछे जाने पर बरकागांव स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) ने कहा कि लुरुंगा इलाका उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि उरीमारी आउटपोस्ट (OP) के तहत आता है। उरीमारी OP इंचार्ज से संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं।
अवैध खनन को लेकर फिर से सवाल
इस इलाके में इस तरह की घटनाओं के बार-बार होने से अवैध कोयला खनन पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले, रौतपारा और चानो इलाकों में खदान ढहने की ऐसी ही घटनाओं में कई मज़दूरों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद, अवैध खनन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रोकने में नाकामी को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है।
प्रशासनिक पुष्टि का इंतज़ार
फिलहाल, स्थिति पर प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतज़ार है। हादसे की वजह और मरने वालों की संख्या के बारे में साफ तस्वीर तभी सामने आएगी जब प्रशासन विवरण की पुष्टि करेगा। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने लगभग सात साल पुराने, विवादित हर्ष फायरिंग मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिहार के साहिबगंज से बीजेपी विधायक राजू सिंह को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है और उन्हें चार साल की जेल की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने मृतक के परिवार को ₹25 लाख का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया है।
यह घटना न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई थी।
यह मामला 31 दिसंबर, 2018 का है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी में एक फार्महाउस पर न्यू ईयर की पूर्व संध्या पर आयोजित पार्टी के दौरान कथित तौर पर जश्न में फायरिंग हुई थी। डांस फ्लोर पर मौजूद आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई थी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कोर्ट लापरवाही को गंभीर अपराध मानता है | कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक कार्यक्रम में हथियार से गोली चलाना बेहद गंभीर लापरवाही है। कोर्ट के मुताबिक, हर किसी को यह समझना चाहिए कि ऐसी हरकतों से किसी की जान जा सकती है। इसलिए, ऐसे मामलों में सख्त कानूनी रुख अपनाना ज़रूरी है।
विधायक पद भी खतरे में पड़ सकता है
चार साल की जेल की सज़ा मिलने के बाद, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act) के प्रावधानों के तहत विधायक राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। कानून में प्रावधान है कि अगर किसी जन प्रतिनिधि को दो साल या उससे ज़्यादा की सज़ा होती है, तो उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है, हालांकि अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही होगा।
खुशी में गोली चलाने (सेलिब्रेटरी फायरिंग) के मामलों में कड़ा संदेश
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सार्वजनिक कार्यक्रमों में खुशी में गोली चलाने जैसी घटनाओं के खिलाफ एक अहम संदेश देता है। कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि अगर लापरवाही से गोली चलाने के कारण किसी की मौत होती है, तो इसके लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।
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