Ranchi CCTV Cameras: झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची की सड़कों, प्रमुख चौक-चौराहों और पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों को कार्यशील रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जिन थानों में कैमरे नहीं लगे हैं, वहां इन्हें स्थापित करने की समयसीमा बताने को कहा है। इस संबंध में गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और रांची के एसएसपी से जवाब मांगा गया है। अदालत ने राज्य में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जारी टेंडर की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी तलब की है। यह निर्देश डोरंडा थाना पुलिस पर एक नाबालिग को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के आरोप से जुड़ी हेवियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित है।
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रांची के आठ थानों में नहीं लगे हैं CCTV कैमरे
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि रांची शहर के आठ पुलिस थानों और ओपी में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। इनमें पंडरा ओपी, बरियातू, धुर्वा, एयरपोर्ट, हिंदीपीढ़ी, विधानसभा, एएचटीयू और साइबर थाना शामिल हैं। शपथ पत्र के अनुसार, रांची शहर के 17 पुलिस स्टेशन और ओपी में फिलहाल 123 सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि जिन थानों में कैमरे नहीं हैं, वहां इन्हें कब तक लगाया जाएगा। अदालत ने राज्य में कैमरे लगाने के लिए जारी टेंडर की स्थिति पर भी जानकारी मांगी है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से भी जवाब मांगा गया है।
चेन छिनतई और सड़क दुर्घटनाओं पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि सीसीटीवी कैमरों की कमी से अपराधों की निगरानी और आरोपियों की पहचान में परेशानी हो सकती है। कोर्ट ने चेन छिनतई जैसी घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं के बाद वाहन चालकों के मौके से भागने की घटनाओं का भी उल्लेख किया। अदालत ने सड़कों और प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त रखने की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य शहर में निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाना और अपराध नियंत्रण में मदद करना है।
नाबालिग को अवैध हिरासत में रखने का आरोप
यह हेवियस कॉर्पस याचिका फिरोज अंसारी एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पुत्र को 4 सितंबर 2026 से डोरंडा थाना में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उस समय उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। याचिका में बच्चे की जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 बताई गई है। इसके आधार पर दावा किया गया कि 4 सितंबर 2026 को उसकी उम्र 17 वर्ष थी। याचिकाकर्ताओं ने इसके समर्थन में आधार कार्ड की प्रति भी अदालत में पेश की। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नाबालिग की उम्र 19 वर्ष बताकर उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। ये आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं; मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद और अधिवक्ता आयुषी अमन ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता और स्थापना से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। इस दौरान सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होने वाले थानों में स्थापना की समयसीमा और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी व्यवस्था को लेकर संबंधित पक्षों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।






















