भागलपुर: नौगछिया सब-डिविजन के खरिक ब्लॉक में स्थित राघोपुर गांव में राघोपुर-नरकटिया तटबंध (embankment) के अचानक टूटने से सोमवार देर रात इलाके में हड़कंप मच गया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, तटबंध का एक हिस्सा सुबह करीब 3:00 बजे जल संसाधन विभाग के कैंप ऑफिस के पास टूट गया। बताया जा रहा है कि तटबंध में आई यह दरार लगभग 70 से 80 मीटर लंबी है। दरार आने के बाद गंगा का पानी तेज़ी से आस-पास के इलाकों में फैलने लगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई।
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ऊर्जा मंत्री के पैतृक गांव में घटना

राघोपुर, बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री और गोपालपुर के विधायक शैलेश कुमार (उर्फ बुलो मंडल) का पैतृक गांव है। तटबंध टूटने की खबर से स्थानीय लोगों में स्थिति को लेकर बेचैनी फैल गई। आशंका है कि पानी निचले इलाकों तक पहुँच सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर टूटे हुए हिस्से की तुरंत मरम्मत नहीं की गई, तो बाढ़ का पानी आस-पास के इलाकों में फैलने से गंभीर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
मरम्मत कार्य में जुटे इंजीनियरों की टीम

घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और कर्मचारी मौके पर पहुँच गए। विभाग की टीम ने नुकसान को रोकने और तटबंध के प्रभावित हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। स्थानीय ग्रामीण भी मरम्मत के काम में मदद कर रहे हैं। विभागीय टीम स्थिति को काबू में करने और पानी के फैलाव को रोकने के लिए तत्काल प्रयास कर रही है।
पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर
तटबंध टूटने की खबर के बाद, नौगछिया के SDPO अनिकेत अमर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थिति पर नज़र रखना शुरू कर दिया। जल संसाधन विभाग और प्रशासन की टीम स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है। आस-पास के इलाकों में पानी फैलने के मद्देनजर ज़रूरी तैयारियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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तटबंध टूटने की पिछली घटनाएँ
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इसी इलाके में कुछ हफ़्ते पहले भी तटबंध का लगभग 100 मीटर लंबा हिस्सा प्रभावित हुआ था। उस समय समय पर बचाव और मरम्मत कार्य करके स्थिति को काबू में कर लिया गया था। अब, तटबंध के फिर से कटने (erosion) से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल, जल संसाधन विभाग की एक टीम मरम्मत के काम में लगी हुई है और प्रशासन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। मुख्य चुनौती गंगा के पानी के बढ़ते फैलाव को रोकना और तटबंध को जल्द से जल्द सुरक्षित करना है।






















