रामगढ़: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की ‘भर्ती यात्रा’ शुरू होने से पहले ही जिले के नेमरा गांव के लोगों ने विरोध किया। महतो ने इसी गांव से यात्रा शुरू करने की योजना बनाई थी। विरोध प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि नेमरा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पैतृक गांव है और उनका पुश्तैनी घर भी यहीं है। वे यह भी बताते हैं कि मुख्यमंत्री के पास उनके गांव के ‘नाइके प्रधान’ (गांव का मुखिया) का पारंपरिक पद है। इसलिए, उन्होंने इस जगह से यात्रा शुरू करने पर आपत्ति जताई है।
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लिखित सूचना न मिलने से ग्रामीण नाराज

ग्रामीणों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने यात्रा शुरू करने से पहले गांव के लोगों को कोई लिखित जानकारी नहीं दी और न ही उनसे अनुमति ली। बातचीत की इस कमी के कारण ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पहले ही लिखित रूप में सूचित किया गया होता तो स्थिति अलग होती। प्रदर्शनकारियों ने अपनी आपत्ति का मुख्य कारण इसी बात को बताया।
पारंपरिक हथियारों के साथ जुटे ग्रामीण

भर्ती यात्रा का विरोध करने के लिए ग्रामीण पारंपरिक हथियारों और तीर-धनुष के साथ जमा हुए। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। उन्होंने साफ कहा कि वे बिना पूर्व सूचना या सहमति के अपने गांव में कोई भी कार्यक्रम नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भले ही यात्रा भावनात्मक कारणों से प्रेरित हो, लेकिन वे विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने का समर्थन नहीं करते हैं।
24 जिलों में यात्रा करने की योजना

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि नेमरा इस एक्टिविस्ट नेता की जन्मभूमि और कर्मभूमि है; इसलिए, वे यहीं से भर्ती यात्रा शुरू करना चाहते हैं। उनका मकसद राज्य के सभी 24 जिलों का दौरा करने से पहले इस जगह पर आशीर्वाद लेना है। इस यात्रा का उद्देश्य भर्ती प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर जनता से जुड़ना है। हालांकि, यात्रा शुरू होने से पहले ही नेमरा में ग्रामीणों के विरोध ने इस स्थिति की ओर सबका ध्यान खींचा है।
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ग्रामीणों के विरोध से विवाद बढ़ा
नेमरा में ग्रामीणों के विरोध ने भर्ती यात्रा को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि देवेंद्र नाथ महतो इस जगह को आंदोलन की शुरुआत के लिए अहम मानते हैं, लेकिन ग्रामीण लिखित सूचना न होने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। फिलहाल, दोनों पक्षों के रुख को देखते हुए सबकी नज़रें नेमरा में ‘भारती यात्रा’ की शुरुआत पर टिकी हैं। अब यह देखना बाकी है कि यह यात्रा कैसे आगे बढ़ती है और ग्रामीणों के विरोध का क्या असर होता है।






















