लखनऊ: अलीगंज इलाके में रिटायर्ड ARTO ललित कुमार के घर पर विजिलेंस की रेड के दौरान ज़ब्त किए गए 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी, ₹1.62 करोड़ कैश और प्रॉपर्टी से जुड़े कागज़ात को कड़ी सुरक्षा के बीच कलेक्ट्रेट ट्रेज़री के स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कर दिया गया है। ज़ब्त सामान की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए गए हैं और उस जगह पर 24 घंटे CCTV से निगरानी रखी जा रही है।
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विजिलेंस जांच के दौरान उठे सवाल

विजिलेंस ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, ललित कुमार के घर से उनके पास से मिले सोने और चांदी के बारे में पूछताछ की गई; उन्होंने दावा किया कि ये चीज़ें उन्हें ससुराल वालों से तोहफ़े में मिली थीं। अधिकारियों ने बताया कि वह अपने बैंक ट्रांज़ैक्शन और प्रॉपर्टी की खरीद के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। शुरुआती जांच से पता चला है कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई ज़्यादातर प्रॉपर्टी की कीमत उनकी घोषित आय से कहीं ज़्यादा है। इसके अलावा, नौकरी के दौरान अलग-अलग ज़िलों में उनकी पोस्टिंग से जुड़े रिकॉर्ड और शिकायतों की भी जांच की जा रही है।
15 से ज़्यादा प्रॉपर्टी के कागज़ात और निवेश के सबूत मिले
विजिलेंस विभाग के मुताबिक, रेड के दौरान 15 से ज़्यादा प्रॉपर्टी से जुड़े कागज़ात मिले। जांच एजेंसी का अनुमान है कि इन प्रॉपर्टी की मौजूदा मार्केट वैल्यू ₹30 करोड़ से ज़्यादा है, जबकि कागज़ात से पता चलता है कि इन्हें लगभग ₹13 करोड़ में खरीदा गया था। इसके अलावा, घर से कई लॉकर, तिजोरियां, कैश, सोने-चांदी की ईंटें, गहने, दो कारें, एक रिवॉल्वर और अलग-अलग बैंकों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश से जुड़े कागज़ात भी बरामद किए गए।
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तीन साल पहले भी की गई थी कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस विभाग ने इससे पहले भी लगभग तीन साल पहले आय से ज़्यादा संपत्ति के मामले में ललित कुमार के घर पर रेड की थी। हालांकि, उस पिछली कार्रवाई के नतीजे के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा ऑपरेशन से ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया है। फिर भी, न तो विभाग और न ही विजिलेंस एजेंसी ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।






















