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Sunday, July 26, 2026

नेपाल हिंसा में अब तक 72 की मौत, मृतकों को मिलेगा ‘शहीद’ का दर्जा और 10 लाख का मुआवजा: अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का ऐलान…

काठमांडू:नेपाल में जेन जी आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा अब तक 72 लोगों की जान ले चुकी है। देश की नव नियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस दुखद घटना की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने हिंसा में मारे गए नागरिकों को ‘शहीद’ का दर्जा देने और उनके परिजनों को 10-10 लाख नेपाली रुपये मुआवजा देने का फैसला लिया।

हिंसा की भयावहता: 700 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त, 5000 वाहन जले

9 सितंबर को हुए हिंसक घटनाक्रम में काठमांडू सहित पूरे देश में बड़े पैमाने पर आगजनी, लूटपाट और हमलों की खबरें सामने आईं।

  • 700 से 1000 से ज्यादा इमारतें या तो पूरी तरह जला दी गईं या तोड़फोड़ की गई।
  • 30 से अधिक पुलिस थानों पर हमला हुआ।
  • 5000 से अधिक वाहन आग के हवाले कर दिए गए।
  • नेपाली अधिवक्ता संघ का मुख्यालय भी पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

इंजीनियरों की टीमें अब क्षतिग्रस्त इमारतों का तकनीकी मूल्यांकन कर रही हैं।

72 मृतकों को ‘शहीद’ का दर्जा, घायलों का मुफ्त इलाज

प्रधानमंत्री कार्की ने जानकारी दी कि 8 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए युवाओं को सरकार ने ‘शहीद’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। उनके परिवारों को प्रत्येक को 10 लाख रुपये का मुआवजा और सभी घायलों के चिकित्सा खर्च का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा।

सरकार मृतकों के शव को उनके पैतृक निवास तक पहुंचाने की भी व्यवस्था करेगी।

72 मौतें – आंकड़े बताते हैं भयावह सच

नेपाल सरकार के मुख्य सचिव एक नारायण आर्यल ने बताया कि अब तक की आधिकारिक मौत की संख्या 72 है, जिसमें शामिल हैं:

  • 59 प्रदर्शनकारी
  • 10 कैदी
  • 3 सुरक्षाकर्मी

सरकार ने इस घटना को “प्रदर्शन की आड़ में सुनियोजित षड्यंत्र” करार देते हुए कहा है कि कई संगठनों की भूमिका की पहचान की जा चुकी है और उनकी जांच की जाएगी।

PM सुशीला कार्की का संदेश: यह विरोध नहीं, साजिश है

अपने पहले ही भाषण में कार्की ने साफ कहा कि,

“जेन जी आंदोलन की आड़ में जिस तरह से लक्षित रूप से निजी संपत्तियों और सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया गया, वह युवा आंदोलन नहीं बल्कि एक साजिश है।”

उन्होंने उद्योग जगत की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और सहयोग की भावना ही नेपाल को इस संकट से उबारने में मदद करेगी।

स्थानीय समर्थन, जनता की आवाज़

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार की जांच की घोषणा का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह घटना सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता फैलाने की सुनियोजित कोशिश है।

 

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