Dhanbad skating champion Rudransh: धनबाद के GD गोयनका पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा के छात्र रुद्रांश शर्मा ने अपनी बेहतरीन स्केटिंग प्रतिभा से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बनाई है। अपनी कड़ी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के कारण, उन्हें अब एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके स्कूल के लिए, बल्कि पूरे झारखंड राज्य और देश के लिए गर्व की बात है।
Highlights:

राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन
रुद्रांश शर्मा ने कई राष्ट्रीय स्तर की स्केटिंग प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पदक जीते हैं। उन्होंने SGFI नेशनल्स और CBSE नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले झारखंड के पहले स्केटर बनकर इतिहास रचा। इसके अलावा, उन्होंने नोएडा में आयोजित 11वीं रैंकिंग ओपन नेशनल चैंपियनशिप में 200-मीटर और 500-मीटर इवेंट्स में दो स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 12वीं रैंकिंग ओपन नेशनल स्पीड स्केटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का और भी बेहतर प्रदर्शन किया। अब तक, रुद्रांश ने कुल 42 पदक जीते हैं, जिनमें 25 स्वर्ण, 9 रजत और 8 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार रिकॉर्ड ने उन्हें देश के होनहार युवा स्केटर्स में से एक के रूप में मजबूती से स्थापित किया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन
रुद्रांश शर्मा को अगस्त 2026 में ओस्टेंड, बेल्जियम में होने वाली 58वीं फ्लैंडर्स ग्रांड प्रिक्स स्केटिंग प्रतियोगिता के लिए चुना गया है। वह इस इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेंगे। यह उनके करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भी पहचान दिलाई है। उनके चयन से उनके स्कूल, उनके परिवार और पूरे झारखंड राज्य में खुशी की लहर है।

सम्मान और उपलब्धियां
उनकी उपलब्धियों के सम्मान में, उन्हें रांची में ₹21,000 के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके खेल कौशल और लगातार सफलता का प्रमाण है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है।
युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा
रुद्रांश शर्मा की सफलता युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी साबित करती है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका चयन न केवल एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारत में खेलों के भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
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