Nirsa Flyover Political Controversy: नेशनल हाईवे-19 (NH-19) पर प्रस्तावित छह-लेन वाले एलिवेटेड फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को लेकर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। लगभग ₹1,130.54 करोड़ की लागत वाले इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर धनबाद के सांसद ढुलू महतो और निरसा के विधायक अरूप चटर्जी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस विवाद के कारण प्रोजेक्ट का काम फिलहाल रुका हुआ है।
Highlights:
ट्रैफिक जाम से राहत के लिए प्रोजेक्ट को मंजूरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने NH-19 (जो झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ता है) पर निरसा और गोविंदपुर इलाकों में लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करने के लिए इस एलिवेटेड फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट के तहत, निरसा में देवियाना गेट से टाटा मोटर्स तक लगभग 4.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए प्रशासन ने हाथबाड़ी से सिनेमा हॉल मोड़ तक अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया था।
सांसद ढुलू महतो का आरोप: विकास कार्यों में बाधा डाली जा रही है
धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने दावा किया कि यह प्रोजेक्ट उनकी पहल पर मंजूर हुआ था और वह लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निरसा के विधायक अरूप चटर्जी विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। सांसद का कहना है कि फ्लाईओवर बनने से निरसा इलाके को लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी राहत मिलेगी, जिससे आम जनता और व्यापारी वर्ग दोनों को फायदा होगा।
विधायक अरूप चटर्जी का पलटवार
सांसद के आरोपों का जवाब देते हुए विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि उन्होंने कभी किसी विकास कार्य का विरोध नहीं किया है। उनका कहना है कि वह केवल उन नीतियों का विरोध करते हैं जिन्हें वे जनहित के खिलाफ मानते हैं। उन्होंने सांसद पर कई राजनीतिक आरोप भी लगाए।
पुनर्वास और व्यापारियों की चिंताएं भी अहम मुद्दे
निरसा नागरिक समिति का कहना है कि बाजार इलाके में ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है, जिससे स्थानीय व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि समिति ने अतिक्रमण हटाने के अभियान का समर्थन किया, लेकिन साथ ही फुटपाथ पर सामान बेचने वालों के उचित पुनर्वास की भी मांग की। फिलहाल, ₹1,130 करोड़ की लागत वाले इस अहम सड़क प्रोजेक्ट का काम राजनीतिक विवाद के कारण रुका हुआ है। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण कार्य कब फिर से शुरू हो सकता है।
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