निरसा: मुहर्रम के मौके पर निरसा में पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। इमाम हुसैन की शहादत की याद में आयोजित इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। जब श्रद्धालु अलग-अलग अखाड़ों और इमामबाड़ों से ताजिया लेकर निकले, तो पूरा इलाका “या हुसैन” के नारों से गूंज उठा।
Highlights:

सुबह से ही तैयारियां शुरू; जुलूस मुख्य रास्तों से गुजरा
मुहर्रम की तैयारियां सुबह-सुबह ही अलग-अलग अखाड़ों और इमामबाड़ों में शुरू हो गई थीं। दोपहर तक, अलग-अलग इलाकों से ताजिया लेकर जुलूस मुख्य सड़कों पर पहुंच गए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

भाईचारे और इंसानियत का संदेश
RJD नेता तारापादो धिवर ने कहा कि इस त्योहार में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को बनाए रखने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी, और मुहर्रम उसी संदेश को याद करने का मौका है। जुलूस के रास्ते में दूसरे समुदायों के लोगों ने इसमें शामिल लोगों का स्वागत किया और पानी व शरबत का इंतजाम किया। इससे आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना दिखी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रशासन ने मुहर्रम जुलूस के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। अहम जगहों पर पुलिस बल तैनात किया गया, बैरिकेड्स लगाए गए और ड्रोन से निगरानी की गई।
कर्बला मैदान में ताजिया का विसर्जन
देर शाम तक सभी ताजिया कर्बला मैदान पहुंच गए, जहां परंपरा के अनुसार उनका विसर्जन किया गया। इस भावुक पल में लोगों ने नम आंखों से इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि दी और शांति व सद्भाव के लिए दुआ की। मुहर्रम को सिर्फ मातम मनाने का मौका नहीं, बल्कि कुर्बानी, सब्र और इंसानियत का संदेश देने वाले आयोजन के तौर पर देखा जाता है। निरसा में यह त्योहार शांतिपूर्ण माहौल और आपसी सहयोग के साथ संपन्न हुआ।






















