रांची: आज पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि है। 16 अगस्त, 2018 को उनके निधन के बाद से देश हर साल इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि देता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें याद किया है और राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को सराहा है। झारखंड के संदर्भ में, अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत का एक अहम अध्याय राज्य के गठन से जुड़ा है। लंबे जन-आंदोलन के बाद, 15 नवंबर 2000 को झारखंड देश का 28वां राज्य बना। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार सत्ता में थी।
Highlights:
अलग झारखंड के लिए दशकों पुराना आंदोलन
अलग झारखंड राज्य की मांग वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले से ही उठ रही थी। अलग राज्य के लिए लंबे समय तक चले आंदोलनों के पीछे आदिवासी पहचान, क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक स्वायत्तता जैसे मुद्दे थे। इस आंदोलन में अलग-अलग समय पर कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भूमिका निभाई। नतीजतन, झारखंड का गठन किसी एक नेता या पार्टी के प्रयासों का परिणाम नहीं था; यह दशकों के जन-संघर्ष का नतीजा था। हालांकि, साल 2000 में अलग राज्य की मांग को संवैधानिक रूप देने की प्रक्रिया में तत्कालीन केंद्र सरकार ने अहम भूमिका निभाई।
अटल सरकार के दौरान राज्य गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी
BJP ने भी 1990 के दशक में अलग झारखंड की मांग को राजनीतिक समर्थन दिया था। 1999 के लोकसभा चुनावों के दौरान, BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपने राजनीतिक एजेंडे में अलग राज्य के गठन को प्राथमिकता दी थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद बिहार के पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव ‘बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000’ था। लोकसभा ने 2 अगस्त, 2000 को यह बिल पास किया, जबकि राज्यसभा ने 11 अगस्त को इसे मंज़ूरी दी। इसके बाद, ‘बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000’ के तहत बिहार के दक्षिणी हिस्से से अलग करके झारखंड राज्य के गठन का रास्ता साफ़ हो गया।
झारखंड 15 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया
15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग करके झारखंड को देश का 28वां राज्य बनाया गया। यह तारीख़ भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी है; इसी वजह से राज्य के गठन के लिए 15 नवंबर का दिन चुना गया था। झारखंड के गठन के बाद, रांची को राज्य की राजधानी बनाया गया। इस तरह, एक अलग राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग संसदीय और संवैधानिक प्रक्रियाओं के ज़रिए पूरी हुई। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी। इसलिए, झारखंड की राजनीतिक यादों में उनका नाम राज्य के गठन की प्रक्रिया से गहराई से जुड़ा हुआ है।
यह भी पढ़ें: CBI का बड़ा एक्शन! रेलवे का सीनियर इंजीनियर ₹50 हजार घूस लेते पकड़ा गया, घर से नकदी और जेवर बरामद
झारखंड की कहानी में अटल की राजनीतिक विरासत
झारखंड के गठन को समझते समय यह जानना ज़रूरी है कि राज्य का निर्माण एक लंबे जन-आंदोलन का नतीजा था। साल 2000 में इसे कानूनी और संवैधानिक रूप देने की प्रक्रिया संसद और तत्कालीन केंद्र सरकार के ज़रिए पूरी हुई। इसी वजह से, झारखंड में अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत का एक बड़ा हिस्सा राज्य के गठन से जुड़ा है। जब देश उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है, तो झारखंड में उनके योगदान को एक बार फिर रेखांकित किया जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के मौके पर उनके राजनीतिक जीवन और राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। झारखंड के संदर्भ में उनकी विरासत की एक अहम कड़ी वह ऐतिहासिक दिन है 15 नवंबर, 2000 जब लंबे संघर्ष के बाद यह राज्य अस्तित्व में आया।






















