Dhanbad Tiranga Yatra 2026: देश के विभाजन की त्रासदी को याद करने और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से धनबाद में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस और हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई। राजगंज से शुरू हुई इस यात्रा में भाजपा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने हिस्सा लिया।
Highlights:
राजगंज से शुरू हुई तिरंगा यात्रा
राजगंज से निकली तिरंगा यात्रा में भाजपा धनबाद ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहन कुंभकार, विधायक तारा देवी, पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता समेत कई पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर बड़ी संख्या में लोग यात्रा में आगे बढ़े। इस दौरान पूरा क्षेत्र देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा। प्रतिभागियों ने “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे लगाए।
गोविंदपुर और बरबा होते हुए निरसा पहुंची यात्रा
राजगंज से शुरू हुई तिरंगा यात्रा गोविंदपुर और बरबा होते हुए निरसा पहुंची। यहां पंजाबी मिलन गुरुद्वारा परिसर में यात्रा का समापन किया गया। यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं और लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया गया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस
निरसा गुरुद्वारा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मौन जुलूस निकाला गया। इस दौरान देश के विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने विभाजन के दौरान लोगों को झेलनी पड़ी पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को याद किया।
इतिहास से सीख लेकर एकता मजबूत करने का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल इतिहास के एक अध्याय को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लोगों की पीड़ा और संघर्ष को स्मरण करने का दिन भी है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपना घर-बार और अपनों को खो दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास की इस त्रासदी से सीख लेते हुए देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। राजगंज से निरसा तक निकली इस तिरंगा यात्रा में जहां राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति का संदेश दिया गया, वहीं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से देश के इतिहास के उस दर्दनाक दौर को भी याद किया गया।























