गणेश चतुर्थी पर बप्पा को लगाएं प्रिय भोग
Ganesh Chaturthi Bhog: को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा के दौरान भगवान गणेश को उनकी पसंद के माने जाने वाले विभिन्न पकवानों का भोग भी लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी को मोदक और दूर्वा विशेष प्रिय माने जाते हैं। इसके अलावा लड्डू, खीर, पूरन पोली और शीरा जैसे सात्विक पकवान भी नैवेद्य के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
Highlights:
मोदक से लेकर लड्डू तक ये भोग करें अर्पित
1. मोदक
गणेश जी के प्रिय भोगों में मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। चावल के आटे, नारियल और गुड़ से तैयार मोदक भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर 21 मोदक का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
2. मोतीचूर या बेसन के लड्डू
गणपति बप्पा को मोतीचूर और बेसन के लड्डू भी अर्पित किए जाते हैं। देसी घी से तैयार लड्डू को नैवेद्य के रूप में चढ़ाने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है।
3. केले का जोड़ा
गणेश जी को भोग में दो पके केले अर्पित करने की मान्यता है। धार्मिक परंपरा में केला जोड़े में चढ़ाने की बात कही जाती है।
4. दूर्वा, गुड़ और नारियल
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। भोग की थाली में 21 गांठ दूर्वा के साथ गुड़ और ताजा नारियल रखा जा सकता है। मान्यता है कि दूर्वा गणपति को विशेष प्रिय है।
5. केसरिया खीर और पंचामृत
दूध, चावल और मखाने से तैयार केसरिया खीर भी भगवान गणेश को अर्पित की जाती है। इसके साथ पंचामृत को भी नैवेद्य में शामिल किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसे सात्विक भोग से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
6. पूरन पोली
चना दाल, गुड़ और घी से तैयार पूरन पोली भी गणेश जी के भोग में शामिल की जा सकती है। मान्यता के अनुसार, इसे भगवान गणेश को अर्पित करने से बुद्धि और सफलता की कामना की जाती है।
7. सूजी का शीरा
सूजी, घी, चीनी और मेवों से तैयार सूजी का शीरा या हलवा भी गणपति बप्पा को भोग में चढ़ाया जाता है। इसे परिवार में सुख और आपसी प्रेम की कामना के साथ अर्पित किया जाता है।
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भोग लगाते समय दिशा का रखें ध्यान
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी को भोग लगाते समय पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। भोग को चांदी, पीतल, तांबे या केले के पत्ते पर रखने की परंपरा बताई जाती है। वहीं कांच, प्लास्टिक या लोहे के बर्तनों में भोग नहीं लगाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा की विधि और नैवेद्य से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं।
गणेश पूजा में तुलसी को लेकर क्या है मान्यता?
गणेश पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल नहीं करने की धार्मिक मान्यता प्रचलित है। पौराणिक कथाओं और पूजा परंपराओं में भगवान गणेश को तुलसी अर्पित करना वर्जित माना गया है। इसलिए गणेश चतुर्थी की पूजा सामग्री तैयार करते समय दूर्वा, फूल और अन्य पारंपरिक सामग्री रखी जा सकती है, लेकिन तुलसी को नैवेद्य में शामिल न करने की परंपरा का पालन किया जाता है। गणेश चतुर्थी पर भोग लगाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात सात्विकता, स्वच्छता और श्रद्धा है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश को नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।






















