एम्स देवघर में पहली बार हुई जागृत क्रैनियोटॉमी
AIIMS Deoghar Awake Craniotomy: एम्स देवघर ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। संस्थान में पहली बार जागृत क्रैनियोटॉमी (Awake Craniotomy) के जरिए ब्रेन ट्यूमर का शोधन किया गया। इस प्रक्रिया की खासियत यह रही कि सर्जरी के महत्वपूर्ण चरण के दौरान मरीज को जागृत और उत्तरदायी रखा गया। इससे चिकित्सकों को मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़े न्यूरोलॉजिकल कार्यों की लगातार निगरानी करने में मदद मिली। एम्स देवघर के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीज की हालत अच्छी है और किसी महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कमी के बिना रिकवरी हो रही है।
Highlights:
क्या होती है Awake Craniotomy?
Awake Craniotomy एक विशेष प्रकार की न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर उन मामलों में किया जाता है, जब ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के ऐसे हिस्सों के करीब स्थित हो, जो बोलने, भाषा, हाथ-पैर की गतिविधि और संवेदना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़े होते हैं। सर्जरी के एक अहम चरण में मरीज को जागृत रखा जाता है। इस दौरान डॉक्टर मरीज से बातचीत करते हैं और उसके बोलने, समझने तथा अन्य न्यूरोलॉजिकल कार्यों का आकलन करते रहते हैं। इससे सर्जिकल टीम को ट्यूमर को सुरक्षित सीमा तक हटाने के साथ मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यात्मक हिस्सों को बचाने में मदद मिल सकती है।
सर्जरी के दौरान हुई लगातार न्यूरोमॉनिटरिंग
एम्स देवघर के अनुसार, ऑपरेशन इंट्राऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग के साथ किया गया। इसके जरिए सर्जरी के दौरान मरीज के न्यूरोलॉजिकल कार्यों में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखी गई। इस प्रक्रिया में मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यात्मक क्षेत्रों की पहचान और मैपिंग की जाती है। इससे सर्जिकल टीम को उन हिस्सों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, जो मरीज के सामान्य कार्यों के लिए जरूरी होते हैं। जटिल ब्रेन सर्जरी के दौरान इस तरह की निगरानी से चिकित्सकों को ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कार्यों का आकलन करने में सहायता मिलती है।
न्यूरोसर्जरी और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर किया ऑपरेशन
संस्थान के अनुसार, इस जटिल प्रक्रिया को न्यूरोसर्जरी विभाग की डॉ. चंद्रिमा बिस्वास, डॉ. सराव कुमार और उनकी टीम ने पूरा किया। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. संजय कुमार, डॉ. नेहा भारती, डॉ. गिरीश और डॉ. सौरव कुमार के साथ अन्य सहायक ओटी स्टाफ ने समन्वय किया। एम्स देवघर ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों और ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों की भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस तरह की सर्जरी के लिए विभिन्न विशेषज्ञ टीमों के बीच समन्वय को अहम बताया गया।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत अच्छी
एम्स देवघर के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति अच्छी है और बिना किसी न्यूरोलॉजिकल घाटे के रिकवरी हो रही है। उपचार करने वाली टीम मरीज की लगातार निगरानी कर रही है। संस्थान ने इस उपलब्धि को देवघर और झारखंड में उन्नत न्यूरोसर्जिकल सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
झारखंड में जटिल न्यूरोसर्जरी की सुविधा बढ़ने की उम्मीद
एम्स देवघर के अनुसार, Awake Craniotomy जैसी जटिल प्रक्रिया की सुविधा उपलब्ध होने से झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अपने क्षेत्र के करीब उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। संस्थान आने वाले समय में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़े जटिल रोगों के उपचार के लिए अपनी न्यूरोसर्जिकल सेवाओं को और विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।






















