भागलपुर में करमा-धरमा पर्व पर बड़ा हादसा, पोखर में डूबने से छह बच्चों की मौत
Bhagalpur Sultanganj Drowning: करमा-धरमा पर्व की खुशियां सोमवार सुबह उस वक्त मातम में बदल गईं, जब पोखर में स्नान करने गए छह बच्चों की डूबने से मौत हो गई। दर्दनाक हादसा सुलतानगंज थाना क्षेत्र के उधाडीह पंचायत अंतर्गत तरैटा बहियार में हुआ। मृतकों में तीन लड़के और तीन लड़कियां शामिल हैं। सभी की उम्र करीब 10 से 12 वर्ष के बीच बताई जा रही है। घटना की पुष्टि स्थानीय रिपोर्टों में की गई है।
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एक बच्चे को बचाने की कोशिश में डूबे छह मासूम

जानकारी के अनुसार, करमा-धरमा पर्व के अवसर पर बच्चे पोखर में स्नान करने गए थे। इसी दौरान एक बच्चा अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे बचाने के प्रयास में अन्य बच्चे भी पानी में उतर गए। देखते ही देखते सभी छह बच्चे गहरे पानी में डूब गए। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण पोखर की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चों को पानी से बाहर निकाला।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
ग्रामीणों और परिजनों ने सभी बच्चों को तत्काल सुलतानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद छहों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। जिन परिवारों में पर्व को लेकर उत्साह था, वहां अचानक मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मृतकों में पांच सुलतानगंज और एक सबौर का
मृतकों की पहचान ज्योति कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, आयुष कुमार, राहुल कुमार, पूजा कुमारी और विकास कुमार के रूप में हुई है। बताया गया कि पांच बच्चे सुलतानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27 स्थित विष्णुटोला के रहने वाले थे, जबकि ज्योति कुमारी सबौर क्षेत्र के रजंदीपुर की निवासी थी। सभी बच्चे अलग-अलग परिवारों से संबंधित थे।
पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर भेजे गए शव
घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा हादसे की जानकारी ली। सभी छह बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर भेज दिए गए हैं। पुलिस मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
पर्व की खुशियां बदलीं मातम में
एक साथ छह बच्चों की मौत से सुलतानगंज और आसपास के इलाकों में शोक की लहर है। करमा-धरमा पर्व के लिए सुबह से तैयारियों में जुटे परिवारों में अब चीख-पुकार मची हुई है। इस घटना ने जलजमाव वाले इलाकों, पोखरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे स्थानों पर बच्चों को अकेले जाने से रोकने और जलस्रोतों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।






















