वायरल वीडियो के बाद जमुई पुलिस ने लिया स्वतः संज्ञान
Jamui Molestation Case: मड़वा पहाड़ इलाके से घूमकर लौट रहे 10वीं कक्षा के छात्र-छात्रा के साथ कथित छेड़खानी और अभद्र व्यवहार के मामले में जमुई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के निर्देश पर गठित टीम ने छापेमारी कर अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को विधि निरुद्ध किया है। वहीं, मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
Highlights:
पांच आरोपियों की पहचान, दो की तलाश जारी
एसपी विश्वजीत दयाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अब तक पांच आरोपियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से तीन नाबालिगों को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर विधि के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। शेष दो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में गठित SIT लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
कोचिंग के बाद मड़वा पहाड़ घूमने गए थे छात्र-छात्रा
पुलिस के अनुसार, घटना 19 सितंबर की शाम की है। जमुई शहर के रहने वाले 10वीं कक्षा के छात्र-छात्रा कोचिंग समाप्त करने के बाद स्कूटी से मड़वा पहाड़ की ओर घूमने गए थे। वापसी के दौरान रास्ते में कुछ स्थानीय युवकों ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार तथा छेड़खानी की। घटना के दौरान बनाए गए तीन अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए थे। इन वीडियो में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टैग करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। वीडियो सामने आने के बाद जमुई के जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
पीड़ित पक्ष की शिकायत के बिना दर्ज हुई प्राथमिकी
जमुई पुलिस ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं मिलने के बावजूद मामले में स्वतः प्राथमिकी दर्ज की गई है। जमुई सदर थाने में कांड संख्या 428/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में नामजद केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्राथमिकी में BNS की धारा 74 और 76(3)(5) तथा POCSO अधिनियम की धारा 8 और 12 को शामिल किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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वायरल वीडियो हटाने की प्रक्रिया शुरू, शेयर करने वालों पर भी नजर
पुलिस ने घटना से संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो सबसे पहले किसने रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर किसने अपलोड किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को साझा न करें। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर अन्य आरोपियों और वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।






















