RIMS में MBBS के 184 छात्रों के प्रमाण पत्र सत्यापन में देरी, जिलों से रिपोर्ट का इंतजार
RIMS MBBS Certificate Verification: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS), रांची में इस वर्ष MBBS में दाखिला लेने वाले 184 विद्यार्थियों के जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों का सत्यापन अब तक पूरा नहीं हो सका है। RIMS प्रबंधन ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों को प्रमाण पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बाद भी जिलावार रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। RIMS की ओर से सभी जिला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन रिपोर्ट भेजने का आग्रह किया गया था। रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण NEET UG की थर्ड काउंसलिंग से पहले प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Highlights:
16 सितंबर को जिलों के DC को भेजे गए थे प्रमाण पत्र
RIMS के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि संस्थान ने 16 सितंबर को सभी 184 विद्यार्थियों के जाति और स्थानीय आवासीय प्रमाण पत्रों की प्रतियां संबंधित जिलों के उपायुक्तों को भेजी थीं। इन प्रमाण पत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की जानी है। इसके बाद रिपोर्ट झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद यानी JCECEB को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।
थर्ड काउंसलिंग से पहले रिपोर्ट मिलने की उम्मीद
RIMS प्रबंधन का उद्देश्य NEET UG की थर्ड काउंसलिंग शुरू होने से पहले सभी प्रमाण पत्रों की जांच पूरी कराना है। इसके लिए जिला प्रशासन से जल्द रिपोर्ट भेजने का अनुरोध किया गया है। प्रमाण पत्रों के सत्यापन में देरी होने पर नामांकन और सीट आवंटन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में RIMS प्रशासन संबंधित जिलों के लगातार संपर्क में है।
पिछले साल फर्जी प्रमाण पत्र का मामला आया था सामने
प्रमाण पत्रों की जांच में इस बार सख्ती पिछले सत्र में सामने आए फर्जीवाड़े के मामले के बाद बढ़ाई गई है। वर्ष 2025 बैच में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर MBBS में नामांकन लेने की शिकायत सामने आई थी। जांच के दौरान दो MBBS विद्यार्थियों और एक BDS छात्रा के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। संबंधित उपायुक्तों की आधिकारिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद RIMS प्रबंधन ने तीनों विद्यार्थियों का नामांकन रद्द कर दिया था।
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मेडिकल सीटों पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सख्ती
RIMS प्रशासन का कहना है कि योग्य और मेधावी विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना प्राथमिकता है। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए नामांकन प्रक्रिया में विस्तृत सत्यापन को जरूरी बनाया गया है। प्रबंधन संबंधित जिला प्रशासन से जल्द से जल्द रिपोर्ट भेजने की अपील कर रहा है, ताकि थर्ड काउंसलिंग में अनावश्यक देरी न हो और सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ सके।






















