IIT-ISM धनबाद में छठे इंडियन नेशनल ग्राउंडवाटर कॉन्फ्रेंस की शुरुआत
IIT ISM Groundwater Conference: आईआईटी आईएसएम धनबाद में शुक्रवार को छठे इंडियन नेशनल ग्राउंडवाटर कॉन्फ्रेंस (INGWC-2026) का आगाज हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का विषय “ग्राउंडवाटर यूटिलाइजेशन–इश्यूज एंड चैलेंजेज अंडर क्लाइमेट चेंज सिनेरियोस” रखा गया है। सम्मेलन में देशभर से पहुंचे विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच भूजल की उपलब्धता, गुणवत्ता, दोहन और संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने भूजल के आकलन, निगरानी, मॉडलिंग और बेहतर प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी आईएसएम के सिविल इंजीनियरिंग, एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग तथा मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग विभाग की ओर से एसोसिएशन ऑफ ग्लोबल ग्राउंडवाटर साइंटिस्ट्स (AGGS) के सहयोग से किया जा रहा है।
Highlights:
भूजल प्रदूषण और अनियंत्रित दोहन को बताया बड़ी चुनौती
उद्घाटन सत्र में प्रो. राजीव सरकार ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थानों के शोधकर्ताओं और क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाना सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने भूजल से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं के साथ समुदाय, उद्योग, बढ़ती जल मांग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की जरूरत बताई। वहीं प्रो. आलोक सिन्हा ने भूजल प्रदूषण, अनियंत्रित दोहन और घटते रिचार्ज को प्रमुख चुनौतियों में शामिल बताया। उन्होंने आर्सेनिक, फ्लोराइड और औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन ने भूजल प्रबंधन को और जटिल बना दिया है।
गणित, डेटा साइंस और मॉडलिंग की भूमिका पर जोर
प्रो. एसपी तिवारी ने भूजल प्रणाली को समझने में गणित, सांख्यिकी, कंप्यूटिंग और डेटा साइंस की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के जरिए भूजल से जुड़े आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण और प्रबंधन किया जा सकता है। एजीजीएस के सचिव और आईआईटी रुड़की के प्रो. बृजेश कुमार यादव ने कहा कि भूजल हाइड्रोलॉजी किसी एक विषय तक सीमित नहीं है। इसके बेहतर अध्ययन और प्रबंधन के लिए अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को एक साथ काम करने की जरूरत है। एजीजीएस के अध्यक्ष प्रो. चेनिम्मलाई मयिल्स्वामी ने बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर बढ़ते दबाव का उल्लेख किया। उन्होंने इस क्षेत्र में युवा शोधकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
जमीनी समस्याओं पर शोध करने की जरूरत
मुख्य अतिथि बीबीएमकेयू के कुलपति प्रो. राम कुमार सिंह ने भूजल को सॉयल-वाटर-प्लांट-एनवायरनमेंट कंटिन्यूम के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से प्रयोगशालाओं के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक समस्याओं को समझने का आह्वान किया। उन्होंने ऐसे शोध और नवाचार विकसित करने पर जोर दिया, जिनका बड़े स्तर पर व्यावहारिक उपयोग किया जा सके। आईआईटी आईएसएम के प्रो. एमके सिंह ने कहा कि भूजल संरक्षण और प्रबंधन केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकारी एजेंसियों के साथ किसान, उद्योग, शहरी निकाय, सिविल सोसाइटी और शिक्षण संस्थानों की भी भूमिका है। उन्होंने भूजल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए “थ्री एम प्रिंसिपल मॉडलिंग, मॉनिटरिंग और मैनेजिंग” को अपनाने पर जोर दिया।
आठ वैज्ञानिकों को AGGS अवॉर्ड से किया गया सम्मानित
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में भूजल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए आठ वैज्ञानिकों को AGGS के विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। AGGS Distinguished Fellow Award प्रो. मृत्युंजय कुमार सिंह और प्रो. अशोक के. केशरी को दिया गया। वहीं AGGS Lifetime Achievement Award डॉ. शिवेंद्र नाथ राय और प्रो. टीआई एल्धो को प्रदान किया गया। इसके अलावा AGGS Fellow Award के लिए प्रो. इंदुमती एम. नांबी, प्रो. आर. सेल्वकुमार, प्रो. बेल्ली शिवकुमार और प्रो. डी. सुरेश कुमार को सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार, कुछ वैज्ञानिकों ने स्वयं पुरस्कार ग्रहण किए, जबकि कुछ की ओर से उनके प्रतिनिधियों ने सम्मान प्राप्त किया। कुछ अन्य पुरस्कार सम्मेलन के समापन समारोह में प्रदान किए जाएंगे।






















