Giridih Child Helpline 1098: विभागीय दिशा-निर्देश के तहत शनिवार, 26 सितंबर 2026 को चाइल्ड हेल्पलाइन, गिरिडीह जिला की टीम ने टीआरपी +2 हाई स्कूल, लेदा में जागरूकता अभियान चलाया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बच्चों से जुड़े अपराध और सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के तरीकों की जानकारी देना था। अभियान के दौरान विद्यार्थियों को बाल विवाह, बाल श्रम, पॉक्सो कानून, बाल उत्पीड़न और बाल तस्करी जैसे गंभीर विषयों के बारे में जानकारी दी गई। टीम ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधानों के बारे में भी समझाया।
Highlights:
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की दी गई जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी बच्चे के साथ शोषण, उत्पीड़न या किसी तरह की परेशानी होने पर चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1098 पर सूचना दी जा सकती है। टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखे जाने की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई।
बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता

कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक समस्याओं पर विशेष चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि कम उम्र में बच्चों को विवाह या मजदूरी के लिए मजबूर करना उनके अधिकारों और भविष्य को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही पॉक्सो कानून और बच्चों के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामलों को लेकर भी जरूरी जानकारी साझा की गई। विद्यार्थियों से ऐसी किसी घटना की जानकारी होने पर चुप न रहने और उचित माध्यम से सूचना देने की अपील की गई।
बच्चों को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक
चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने विद्यार्थियों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही जरूरतमंद और संकट में फंसे बच्चों की मदद के लिए आगे आने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि उनकी सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ी जानकारी उन्हें किसी भी मुश्किल परिस्थिति में सही कदम उठाने में मदद कर सकती है।
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शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद
जागरूकता अभियान में चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर प्रभु कुमार और केस वर्कर नरेश कुमार वर्मा मौजूद रहे। विद्यालय के शिक्षक, छात्र और छात्राओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता व्यवस्था का इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई।






















