नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ जिउतिया पर्व
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ झारखंड के देवघर और साहिबगंज में जिउतिया पर्व की शुरुआत हो गई है। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व के पहले दिन शुक्रवार को महिलाओं ने नहाय-खाय की परंपरा निभाई। देवघर में बाबा धाम परिसर से लेकर बाजारों तक चहल-पहल देखने को मिली, वहीं साहिबगंज के मुक्तेश्वर गंगा घाट पर महिलाओं ने स्नान कर व्रत का अनुष्ठान शुरू किया। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना के लिए किया जाता है। इस दौरान नहाय-खाय, निर्जला उपवास और पारण की परंपरा निभाई जाती है।
Highlights:
नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ जिउतिया पर्व
जिउतिया पर्व के पहले दिन महिलाओं ने स्नान के बाद भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत की। देवघर में पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं पूजा-पाठ और अनुष्ठान के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी करती नजर आईं। साहिबगंज में भी पर्व की शुरुआत पर महिलाओं ने मुक्तेश्वर गंगा घाट पर स्नान किया। इसके बाद गंगाजल लेकर घर पहुंचीं और पारंपरिक तरीके से कई तरह की सब्जियां और पकवान तैयार किए। व्रत रखने वाली महिलाओं ने बताया कि यह पर्व बेटे और बेटी, दोनों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना के लिए किया जाता है।
राजा जीमूतवाहन के त्याग से जुड़ी है जिउतिया की कथा
बाबा धाम के पुजारी प्रमोद शृंगारी के अनुसार, जिउतिया व्रत का संबंध राजा जीमूतवाहन की करुणा और त्याग से जुड़ी पौराणिक कथा से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने एक मां के पुत्र की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान देने का निर्णय लिया था। कथा के मुताबिक, एक बार राजा जीमूतवाहन पहाड़ पर भ्रमण कर रहे थे। वहां उन्होंने एक बुजुर्ग महिला को रोते हुए देखा। पूछने पर महिला ने बताया कि उसका पुत्र शंखचूड़ नाग है और गरुड़ उसे अपना आहार बनाने वाले हैं। पुत्र को खोने की आशंका से महिला दुखी थी। महिला की पीड़ा देखकर जीमूतवाहन ने उसकी संतान की रक्षा के लिए स्वयं गरुड़ का आहार बनने का फैसला किया। राजा के त्याग और करुणा से प्रभावित होकर गरुड़ ने उन्हें जीवनदान दिया। इसी कथा को जिउतिया पर्व की धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है।
देवघर के बाजारों में बढ़ी भीड़, सब्जियों के दाम चढ़े
जिउतिया पर्व के चलते देवघर के बाजारों में खरीदारी बढ़ गई है। पूजा और पारंपरिक भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मांग बढ़ने के साथ कुछ वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। स्थानीय बाजार के अनुसार, आम दिनों में 40 से 50 रुपये किलो बिकने वाला सतपथु अब करीब 200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं, झिंगली की कीमत लगभग 140 रुपये किलो बताई जा रही है। पर्व के लिए जरूरी सामान खरीदने पहुंच रही महिलाओं के कारण बाजारों में सुबह से ही चहल-पहल बनी हुई है।
मछली बाजार में भी बढ़ी मांग
जिउतिया पर्व के अवसर पर मछली बाजार में भी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय परंपरा के अनुसार, कई परिवारों में नहाय-खाय के दौरान मछली का सेवन किया जाता है। इसी वजह से पर्व के मौके पर मछली की मांग बढ़ जाती है। mमांग बढ़ने के साथ मछली की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। हालांकि, अलग-अलग किस्मों की मछलियों के दाम में कितना बदलाव हुआ है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
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शनिवार से निर्जला व्रत, रविवार को होगा पारण
धर्माचार्यों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे से महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। बताया गया है कि व्रत रविवार सुबह लगभग 7:30 बजे तक चलेगा। इसके बाद महिलाएं धार्मिक विधि-विधान के अनुसार पारण करेंगी। जिउतिया पर्व के दौरान माताएं अपनी संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। देवघर और साहिबगंज में इस पर्व को लेकर श्रद्धा और आस्था का माहौल बना हुआ है।






















