BBMKU Smriti Samman 2026, धनबाद: बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा केंद्र में रविवार को स्मृति सम्मान-2026 समारोह आयोजित किया गया। झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति और खोरठा पत्रिका ‘सहिया’ के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ युवा रचनाकारों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्यिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन पर जोर दिया गया।
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झारखंड की अन्य भाषाओं को भी जोड़ने की जरूरत: कुलपति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीबीएमकेयू के कुलपति प्रो. डॉ. रामकुमार सिंह ने कहा कि भविष्य में झारखंड की अन्य भाषाओं को भी इस पहल से जोड़ने की जरूरत है। इससे राज्य की भाषाई विविधता, साहित्यिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को उचित पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और उनके साहित्य को आगे बढ़ाने के प्रयासों के विस्तार पर जोर दिया।
माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से शुरुआत
समारोह की शुरुआत बिनोद बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों तथा युवा रचनाकारों को सम्मानित किया गया। आयोजन का उद्देश्य साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराना रहा।

पांच वर्षों से भाषा और संस्कृति के संरक्षण में जुटी समिति
झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिरोमणि महतो ने कहा कि समिति पिछले पांच वर्षों से साहित्य, भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, समिति के प्रयासों के फलस्वरूप झारखंड सरकार ने राज्य साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और जनजातीय भाषा एवं साहित्य अकादमी के गठन का निर्णय लिया है।

क्षेत्रीय भाषाओं को पहचान दिलाने पर जोर
समारोह में साहित्यकारों और युवा रचनाकारों को सम्मानित करने के साथ झारखंड की भाषाई विविधता को संरक्षित रखने की आवश्यकता भी सामने आई। वक्ताओं के विचारों में क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को प्रोत्साहन देने और नई पीढ़ी को अपनी भाषाई-सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश प्रमुख रहा। कार्यक्रम ने साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने तथा झारखंड की विविध भाषाओं को व्यापक पहचान दिलाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।























