Laxmikant Munda Murder Case: रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, डोरंडा क्षेत्र की 96 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज की अनुशंसा अस्वीकृत होने से नाराज होकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मामले में तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। डीएसपी मुख्यालय प्रथम अमर कुमार पांडेय ने प्रेसवार्ता में बताया कि 24 अक्टूबर को नामकुम थाना क्षेत्र के जोरार तेतरी टोली में राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या कर दी गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया गया था। टीम ने जांच के दौरान विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंची।
Highlights:
96 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर विवाद
पुलिस के मुताबिक, बड़ा घाघरा मौजा की खाता संख्या 29 की 96 डिसमिल जमीन आरोपियों ने अलग-अलग लोगों को बेची थी। इसके बाद जमीन के दाखिल-खारिज के लिए अरगोड़ा अंचल में आवेदन दिया गया था। आवेदन के साथ जमा दस्तावेजों की जांच के दौरान उनमें भिन्नता पाई गई थी। बताया गया कि राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा ने दस्तावेजों में अंतर मिलने के बाद अंचलाधिकारी से दाखिल-खारिज की अनुशंसा अस्वीकृत करने की सिफारिश की थी। पुलिस का दावा है कि इसी फैसले से आरोपी नाराज थे और उन्होंने राजस्व कर्मचारी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
23 अक्टूबर की रात हत्या की वारदात
डीएसपी अमर कुमार पांडेय के अनुसार, पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने फरार आरोपियों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाने की बात स्वीकार की है। पुलिस के मुताबिक, 23 अक्टूबर की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या की गई थी। हालांकि, घटना के संबंध में पुलिस की ओर से सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले की जांच आगे भी जारी है। पुलिस ने बताया कि वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से आरोपी घटनास्थल से सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर और राजस्व कर्मचारी का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गए थे। पुलिस इन वस्तुओं और अन्य साक्ष्यों के संबंध में भी जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में दो एक ही परिवार के
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप गोसाईं और सिंटू कुमार गोसाईं के रूप में हुई है। दोनों के पिता का नाम बृज गोसाईं है और वे बड़ा घाघरा, डोरंडा के निवासी हैं। तीसरे आरोपी की पहचान अमित टोप्पो उर्फ अमित गोसाईं के रूप में हुई है। वह स्वर्गीय राकेश टोप्पो का पुत्र है और लालपुर के डंगरा टोली का निवासी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड में भोला गोसाईं, अमित सिंह और शैलेश की भी संलिप्तता सामने आई है। तीनों फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
कई थानों के अधिकारियों ने संभाली जांच की जिम्मेदारी
हत्याकांड के खुलासे के लिए गठित एसआइटी में कई थानों के पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया था। टीम में डीएसपी मुख्यालय प्रथम अमर कुमार पांडेय, डीएसपी हटिया नीरज कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बुंडू ओमप्रकाश, नामकुम थाना प्रभारी रामनारायण सिंह, डोरंडा थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह, बुंडू थाना प्रभारी जयदीप टोप्पो, टाटीसिलवे थाना प्रभारी हंसे उरांव, दशम फॉल थाना प्रभारी कुंदन कुमार और खरसीदाग ओपी प्रभारी मनीष कुमार शामिल थे। इसके अलावा पुलिस अवर निरीक्षक जयदेव सराक, शशि रंजन और सत्यप्रकाश उपाध्याय के साथ तकनीकी शाखा के शाह फैजल और बलेंद्र कुमार ने भी जांच में सहयोग किया। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।






















