Dhanbad Orthopedic Surgeon Conference 2026: पेल्विस और हिप फ्रैक्चर का इलाज आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण अब पहले की तुलना में काफी आसान और संभव हो गया है। करीब 30 वर्ष पहले तक इस तरह के फ्रैक्चर को लाइलाज माना जाता था और कई चिकित्सक इसकी सर्जरी करने से भी बचते थे। यह बातें देश के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ और ऑल इंडिया ऑर्थोपेडिक सर्जन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ रमेश सेन ने कहीं। वह शनिवार को होटल वेडलॉक ग्रीन में आयोजित दो दिवसीय पांचवें धनबाद ऑर्थोपेडिक सर्जन कॉन्फ्रेंस 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
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आधुनिक तकनीक से पेल्विस और हिप फ्रैक्चर का इलाज संभव

डॉ सेन ने कहा कि पहले पेल्विस और हिप फ्रैक्चर के इलाज को लेकर चिकित्सकों के पास पर्याप्त जानकारी और तकनीकी दक्षता नहीं थी। इस वजह से इसकी सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण माना जाता था। लेकिन चिकित्सा विज्ञान में हुए विकास और नई तकनीकों की मदद से अब ऐसे मरीजों का ऑपरेशन संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में पेल्विस या हिप के क्षतिग्रस्त होने पर शरीर से काफी रक्तस्राव हो सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर प्राथमिक उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए बेडशीट को मोड़कर पेल्विस के आसपास मजबूती से बांधने की तकनीक का उल्लेख किया। इससे घायल को अस्पताल पहुंचाने तक रक्तस्राव कम करने में मदद मिल सकती है।
बढ़ती उम्र में कमजोर होती हैं हड्डियां
डॉ सेन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में घर में मामूली गिरावट से भी पेल्विस या हिप फ्रैक्चर हो सकता है। हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित खानपान जरूरी है। लोगों को दूध, फल और हरी सब्जियों का पर्याप्त सेवन करना चाहिए। इसके साथ नियमित व्यायाम और शारीरिक सक्रियता भी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने घुटनों के दर्द को भी बढ़ती उम्र में आम समस्या बताया। उनके अनुसार, नियमित व्यायाम और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से घुटनों की परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है। जब घुटने की समस्या इतनी बढ़ जाए कि व्यक्ति के लिए चलना-फिरना मुश्किल हो जाए, तब चिकित्सकीय सलाह के आधार पर घुटना प्रत्यारोपण पर विचार किया जा सकता है।
नई तकनीक की जानकारी साझा करने के लिए आयोजित सम्मेलन
डॉ रमेश सेन ने कहा कि वह देश-विदेश में जाकर हड्डी रोग विशेषज्ञों को इलाज और ऑपरेशन की नई तकनीकों से परिचित कराते रहते हैं। इसी क्रम में वह धनबाद में आयोजित पांचवें ऑर्थोपेडिक सर्जन सम्मेलन में शामिल हुए हैं। सम्मेलन में उन्होंने वीडियो के माध्यम से ऑपरेशन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी भी दी। ऑर्थोपेडिक क्लब धनबाद के अध्यक्ष डॉ संजय चौधरी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का आयोजन चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। क्लब के सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ धीरज चौधरी ने क्लब की गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं, सहसंयोजक डॉ कारणदीप संधू ने कहा कि ऐसे आयोजनों से चिकित्सकों को नई तकनीक सीखने का अवसर मिलता है, जिसका लाभ अंततः मरीजों को मिल सकता है।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न हड्डी रोग विशेषज्ञों ने अपने शोधपत्र और विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में डॉ नदीम फारुकी, डॉ राकेश अग्रवाल, डॉ मनीष राज, डॉ आनंद शंकर, डॉ आकाश, डॉ सागर कदम, डॉ सुनील हाजरा, डॉ प्रियंक बागथरिया, डॉ सुशील सिंह, डॉ शशांक कंचन, डॉ निर्मल कुमार, डॉ द्विवेदी कनक भूषण, डॉ आशीष बजाज और डॉ आनंद मोदी सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे। आयोजन के दूसरे दिन रविवार को डॉ रमेश सेन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकों के लिए ऑपरेशन से संबंधित विशेष व्यावहारिक सत्र आयोजित करेंगे। इस दौरान शवों पर सर्जिकल तकनीकों का प्रदर्शन कर चिकित्सकों को नई जानकारी देने की योजना है। दो दिवसीय सम्मेलन का समापन रविवार को होगा।






















