21.6 C
Jharkhand
Wednesday, November 4, 2026

Jharkhand High Court Divorce Case: पत्नी की मानसिक बीमारी साबित नहीं कर सका पति, झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की अपील

Jharkhand High Court Divorce Case, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल असामान्य व्यवहार या सामान्य आरोपों के आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि विवाह भारतीय समाज में विशेष महत्व रखता है और पति-पत्नी को वैवाहिक जीवन में आने वाली बीमारियों, परेशानियों तथा कठिन परिस्थितियों का सामना एक-दूसरे का साथ देते हुए करना चाहिए। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पत्नी पर क्रूरता और मानसिक बीमारी का आरोप लगाकर तलाक मांगने वाले पति की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने चतरा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी।

फैमिली कोर्ट के फैसले को पति ने दी थी चुनौती

पति-पत्नी की शादी 31 जनवरी 2016 को हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है। पति सीआईएसएफ में कार्यरत था और उसकी पोस्टिंग राजस्थान के कोटा में थी। उसने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) और 13(1)(iii) के तहत तलाक की मांग की थी। चतरा फैमिली कोर्ट ने 7 सितंबर 2024 को उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पत्नी के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर लगाए थे आरोप

पति ने अपनी याचिका में दावा किया था कि शादी के शुरुआती दिनों से ही पत्नी का व्यवहार असामान्य और आक्रामक था। उसके मुताबिक, पत्नी बिना वजह हंसती थी, खुद से बातें करती थी और रिश्तेदारों के सामने भी उचित कपड़ों के बिना आ जाती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया था कि पत्नी की मानसिक स्थिति से जुड़ी जानकारी शादी से पहले छिपाई गई थी। दूसरी ओर, पत्नी ने मानसिक बीमारी के आरोपों को गलत बताया था। उसने पति पर दहेज के रूप में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने पाया कि पति और उसके गवाह क्रूरता के आरोपों के समर्थन में किसी खास घटना का स्पष्ट विवरण या पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सके।

मानसिक बीमारी के लिए विशेषज्ञ साक्ष्य जरूरी

मानसिक बीमारी के आधार पर तलाक की मांग पर विचार करते हुए खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(iii) के तहत बीमारी की प्रकृति और गंभीरता ऐसी होनी चाहिए, जिससे दूसरे पक्ष के लिए साथ रहना उचित रूप से संभव न रह जाए। केवल कुछ असामान्य व्यवहार या एक-दो घटनाओं से मानसिक बीमारी साबित नहीं होती। इसके लिए विशेषज्ञ साक्ष्य और उचित चिकित्सकीय प्रमाण आवश्यक हैं। पति ने डॉ. एम. जलील की मनोवैज्ञानिक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया था। इसमें पत्नी में स्किजोफ्रेनिया जैसी समस्या होने की बात कही गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट में स्किजोफ्रेनिया की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई थी और न ही बीमारी को लाइलाज बताया गया था। रिपोर्ट में कुछ हल्की असामान्य मानसिक प्रतिक्रियाओं का उल्लेख था।

रिनपास मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में नहीं मिले बीमारी के लक्षण

मामले में रांची स्थित रिनपास में गठित मेडिकल बोर्ड ने भी पत्नी की जांच की थी। दोनों पक्षों की मौजूदगी में हुई जांच के बाद बोर्ड ने पत्नी में किसी तरह की मानसिक बीमारी के लक्षण नहीं पाए थे। पति ने बाद में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर सवाल उठाए, लेकिन बोर्ड के किसी सदस्य से जिरह करने की मांग नहीं की। अदालत ने यह भी गौर किया कि पत्नी सुनवाई के दौरान सवालों का सामान्य और उचित तरीके से जवाब दे रही थी। वह अपने बेटे की देखभाल कर रही थी और उसने पति के साथ दोबारा वैवाहिक जीवन शुरू करने की इच्छा भी जताई थी। वहीं, पति ने स्वीकार किया कि उसने पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी थी।

विवाह में कठिन समय का सामना साथ करने की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में विवाह को विशेष सम्मान दिया जाता है। वैवाहिक जीवन में सुख और कठिनाइयां दोनों आती हैं। बीमारी या मुश्किल परिस्थितियों में पति-पत्नी को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने माना कि पति पत्नी के खिलाफ क्रूरता के आरोप साबित नहीं कर सका। इसके अलावा, ऐसी गंभीर मानसिक बीमारी का प्रमाण भी पेश नहीं किया गया, जो कानून के तहत तलाक का आधार बन सके। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए चतरा फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ज्योति नयन ने पक्ष रखा।

spot_img
Video thumbnail
अधिकांश जनप्रतिनिधि बिकाऊ है! औकात के हिसाब से लगती है कीमत... सांसद पप्पू यादव का बड़ा सियासी हमला!
01:37
Video thumbnail
जारी है मिठाईयों में हानिकारक रंगों का इस्तेमाल, 2.5 टन चंपई रंग वाली लड्डू फ़ूड सैफ्टी विभाग ने किया
03:13
Video thumbnail
बारामुड़ी खटाल विवाद पर विधायक अरूप चटर्जी ने तोड़ी चुप्पी, यादव समाज के समर्थन में खुलकर आए सामने!
00:49
Video thumbnail
JLKM कार्यकर्ताओं को सांसद ढुलु महतो ने कहा कु-त्ता तो थिंक टैंक प्रकाश कुमार ने ऐसे दिया जवाब...
01:43
Video thumbnail
शिक्षकों के तबादले व BPL एडमिशन में पैसे के खेल !अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठें विधायक अरूप चटर्जी
03:04
Video thumbnail
जन मुद्दों को छोड़ MP ढुलू महतो असंवैधानिक मुद्दों पर कर रहे हैं बात, JLKM नेत्री भारती महतो का हमला
01:57
Video thumbnail
खटाल की आड़ में अवैध कब्जे वाली जमीन बचाना चाहते हैं सांसद ढुल्लू महतो! सुशील मंडल का बड़ा आरोप
02:16
Video thumbnail
सांसद ढुल्लू महतो के बयान पर JLKM का पलटवार! पुतला दहन के बाद जिला प्रवक्ता महेश दुबे ने क्या कहा?
02:55
Video thumbnail
झरिया में फूड सेफ्टी ऑफिसर की बड़ी कार्रवाई! प्रतिबंधित रंग से बना 360 kg बताशा और मिलावटी सेवई सील!
03:39
Video thumbnail
अभिनेता चंकी पांडेय पहुंचे गोविंदपुर, प्रतिभागी बच्चों को दिया सफलता का टिप्स
02:38

रिलेटेड न्यूज़

- Advertisement -spot_img

Most Popular