पाकुड़: हिरणपुर प्रखंड के धनगड़ा गांव में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। गांव के प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं पिछले कई महीनों से अधूरे और असुरक्षित भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल का पुराना भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जिसे बंद कर दिया गया है।
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अस्थायी व्यवस्था, लेकिन खतरे से खाली नहीं
स्थानीय प्रशासन द्वारा अस्थायी रूप से गांव के ही एक अधूरे भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन यह भवन भी न तो पूरा है, न ही सुरक्षित। छत से पानी टपकता है, दीवारों में दरारें हैं और किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
2017 में शुरू हुआ निर्माण, अब तक अधूरा
गांव के लोगों का कहना है कि विद्यालय भवन का निर्माण कार्य 2017 में शुरू किया गया था, लेकिन आठ साल बीत जाने के बावजूद अब तक कार्य पूरा नहीं हो सका। निर्माण अधर में लटका हुआ है और बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अनिता पूर्ति ने बताया:
“इसकी जानकारी विभाग को पहले नहीं थी। अब जानकारी मिल गई है और जल्द ही भवन निर्माण का कार्य पूरा कराया जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।“
स्थानीय लोगों की मांग
गांव के अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में शिक्षा प्राप्त हो सके।





















