आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का पर्व — छठ महापर्व
भगवान सूर्य की उपासना और लोक आस्था का प्रतीक चार दिवसीय छठ महापर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि (रविवार) को पर्व के दूसरे दिन व्रती महिलाओं ने पूर्ण पवित्रता और नियमों के साथ खरना पूजन किया। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को शुभ मुहूर्त में छठी माता की पूजा-अर्चना की गई।
मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर, पूड़ी, केला, रोटी और रसियाव भात का प्रसाद तैयार किया गया। पूजा के बाद सूर्य देव और छठी माता को भोग अर्पित कर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया गया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय हो उठा जब महिलाओं ने पारंपरिक भजन — “हे छठी मइया सुन ल अरजिया हमार…” गाए।
खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हुआ, जो छठ पर्व का सबसे कठिन और पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। यह व्रत आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस पूजन से सूर्य देव और छठी माता व्रतियों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं।
सोमवार को पर्व का तीसरा दिन — षष्ठी तिथि — रहेगा, जब श्रद्धालु अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल के अनुसार, इस दिन सूर्योदय सुबह 6:13 बजे और सूर्यास्त शाम 5:27 बजे होगा। इसी समय व्रती महिलाएं घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देंगी।
अगले दिन मंगलवार (28 अक्टूबर) को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ महापर्व का समापन होगा। लोकमान्यता है कि उगते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में सुख, शांति, संतान की समृद्धि और आरोग्यता की प्राप्ति होती है।





















