Al Iqra Teachers Training College Seminar, धनबाद: शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। खेलकूद, भाषण, वाद-विवाद और सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित करती हैं। इसी विषय पर सोमवार को गोविंदपुर स्थित अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई में बाधा या व्यक्तित्व विकास की कुंजी’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में बीएड सत्र 2026-28 के प्रशिक्षुओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने सह-शैक्षिक गतिविधियों के महत्व और शिक्षा में उनकी भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
Highlights:
संगोष्ठी में शिफा ने प्राप्त किया पहला स्थान
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर शिफा (अनुक्रमांक-9) ने प्रथम स्थान हासिल किया। साक्षी श्रीवास्तव (अनुक्रमांक-5) दूसरे और अविनाश कुमार (अनुक्रमांक-18) तीसरे स्थान पर रहे। तीनों प्रतिभागियों को मोमेंटो और मानपत्र देकर सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी में विशेष अतिथि के रूप में गोविंदपुर +2 हाई स्कूल के प्रधानाचार्य विजय कुमार तांती उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शमीम अहमद ने की।
व्यक्तित्व विकास में सह-शैक्षिक गतिविधियों की अहम भूमिका
अपने संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शमीम अहमद ने कहा कि शिक्षा का दायरा पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों को भी समान महत्व देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सह-शैक्षिक गतिविधियां भावी शिक्षकों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, रचनात्मकता और निर्णय लेने की योग्यता विकसित करती हैं।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को इन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, भविष्य में एक प्रभावी शिक्षक की भूमिका निभाने के लिए विषय का ज्ञान होने के साथ-साथ व्यवहारिक और सामाजिक दक्षता भी आवश्यक है।
खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिभा निखारने का माध्यम
विशेष अतिथि विजय कुमार तांती ने कहा कि खेलकूद, भाषण, वाद-विवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियां विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने में मदद करती हैं। उन्होंने विद्यालयों में पढ़ाई के साथ इन गतिविधियों को भी पर्याप्त महत्व देने की आवश्यकता बताई।
संगोष्ठी के दौरान प्रशिक्षुओं ने इस बात पर चर्चा की कि सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई में बाधा नहीं बनतीं। सही नियोजन और समय प्रबंधन के जरिए इन्हें शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर ढंग से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार होते हैं।
सफल शिक्षक के लिए किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक दक्षता जरूरी
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों की भी उपस्थिति रही। अंत में यह संदेश दिया गया कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए केवल विषयगत जानकारी पर्याप्त नहीं है। व्यवहारिक दक्षता, सामाजिक संवेदनशीलता, रचनात्मक सोच और प्रभावशाली व्यक्तित्व का विकास भी जरूरी है। संगोष्ठी का उद्देश्य भावी शिक्षकों को शिक्षा के व्यापक स्वरूप और सह-शैक्षिक गतिविधियों के महत्व से परिचित कराना रहा।






















