बिहार सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य की परिवहन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मोबाइल स्क्वाड में तैनात कांस्टेबलों को ₹3,000 का मासिक ‘राशन मनी भत्ता’ देने का आदेश जारी किया है। यह राशि उनके नियमित मासिक वेतन के अतिरिक्त प्रदान की जाएगी।
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विभाग का कहना है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात मोबाइल स्क्वाड कांस्टेबलों को अक्सर ड्यूटी के दौरान भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। नतीजतन, यह विशेष भत्ता उन्हें राहत प्रदान करेगा और उनके मनोबल तथा कार्यक्षमता दोनों को बढ़ाएगा।
दूरदराज के इलाकों में तैनाती
परिवहन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मोबाइल स्क्वाड कांस्टेबलों को राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, ग्रामीण क्षेत्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाता है। उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में वाहनों के अवैध संचालन पर रोक लगाना, ओवरलोडेड वाहनों की जांच करना और यातायात नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है।
इन कर्मियों को अक्सर ऐसी जगहों पर अपनी ड्यूटी करनी पड़ती है जहां भोजन, पीने का पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं। कई बार उन्हें रात के समय भी लगातार सड़कों पर तैनात रहना पड़ता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने यह विशेष भत्ता लागू किया है।
वित्त विभाग के प्रस्ताव पर आधारित निर्णय
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय 11 अक्टूबर, 2017 को वित्त विभाग द्वारा जारी एक प्रस्ताव के प्रावधानों के अनुरूप है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि फील्ड में लगातार सक्रिय रहने वाले कर्मियों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
यह भत्ता उन कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता के रूप में काम करेगा जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सड़क परिवहन प्रणाली के सुचारू संचालन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसी परिस्थितियां जहां यह लाभ लागू नहीं होगा
विभागीय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राशन मनी भत्ता सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होगा। यदि कोई मोबाइल स्क्वाड कांस्टेबल छुट्टी पर रहता है, प्रशिक्षण प्राप्त करता है, या 30 दिनों से अधिक की निरंतर अवधि के लिए आधिकारिक ड्यूटी पर बाहर रहता है, तो वह उस अवधि के दौरान इस भत्ते का हकदार नहीं होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा केवल उन कर्मियों को दी जाएगी जो सक्रिय रूप से फील्ड ड्यूटी कर रहे हैं और परिवहन नियमों के अनुपालन की निगरानी कर रहे हैं।
परमिट नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर विभाग की कड़ी नज़र
इस बीच, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने राज्य में परमिट नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विभागीय जांच में पता चला कि लगभग पांच दर्जन बसें तय शर्तों के खिलाफ चल रही थीं। नतीजतन, संबंधित जिला परिवहन अधिकारियों (DTOs) को कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
विभाग के अनुसार, कुछ बसें अपने तय रूट से हटकर चल रही थीं, जबकि कई मामलों में परमिट की अन्य शर्तों का उल्लंघन भी पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से न केवल परिवहन व्यवस्था बाधित होती है, बल्कि सरकारी राजस्व का भी नुकसान होता है।
इन जिलों में सबसे ज़्यादा मामले
जांच के दौरान सबसे ज़्यादा अनियमितताएं औरंगाबाद जिले में पाई गईं, जहां 12 बसों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसके बाद सूची में गया जिला (11 बसें) और नवादा जिला (7 बसें) हैं।
पटना और मुजफ्फरपुर से चार-चार बसों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इसके अलावा, लखीसराय, नालंदा और जमुई जिलों से तीन-तीन बसों की पहचान नियमों के उल्लंघन के लिए की गई है। अन्य जिलों में भी जांच के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
सड़क सुरक्षा और अनुशासन पर ज़ोर
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ़ दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि राज्य की परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। जहां एक ओर बेहतर सुविधाएं देकर फील्ड कर्मचारियों के काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा रही है।
विभाग का मानना है कि इन उपायों से सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और यात्रियों के लिए सुरक्षित व बेहतर ढंग से संचालित परिवहन सेवाएं सुनिश्चित होंगी। विभाग निकट भविष्य में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आगे कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
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