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Monday, October 5, 2026

Bihar New Rail Line: आखिर चिकन नेक में क्यों बन रही है नई रेलवे लाइन? जानिए पूरा प्लान

Bihar New Rail Line: भारतीय रेलवे ने देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) में नई ब्रॉडगेज रेल लाइन बिछाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ठाकुरगंज-चतरहाट (रंगापानी-धूमडांगी) के बीच 24.40 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और मिट्टी परीक्षण का कार्य शुरू हो गया है। इस परियोजना को पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सर्वे पूरा होने के बाद तैयार होगी डीपीआर

रेलवे अधिकारियों के अनुसार पहले पूरे प्रस्तावित रूट का तकनीकी सर्वे किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होगी। डीपीआर के आधार पर भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक मंजूरी और निर्माण कार्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सर्वे के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। इन परीक्षणों के जरिए जमीन की मजबूती, भूजल स्तर, रेलवे ट्रैक, पुल और अन्य संरचनाओं के निर्माण की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। साथ ही जल निकासी, स्टेशन यार्ड, पुलों के डिजाइन और यातायात संबंधी तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

ठाकुरगंज से न्यू जलपाईगुड़ी तक मिलेगा नया रेल मार्ग

नई रेलवे लाइन बनने के बाद चिकन नेक क्षेत्र में चौथा रेल कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। वर्तमान में इस इलाके में तीन प्रमुख रेल मार्ग संचालित हैं। नई लाइन ठाकुरगंज को सीधे न्यू जलपाईगुड़ी मुख्य रेल मार्ग से जोड़ेगी, जिससे ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और मौजूदा रेल लाइनों पर दबाव भी कम होगा।

प्रारंभिक योजना के अनुसार यह रेल लाइन ठाकुरगंज स्टेशन के उत्तर दिशा से निकलकर सियालडांगा, धर्मकांटा चौक, बोड़ोबंगला, छैतनगुड़ी, योगी टोला, धापोडांगी, डुमरीडांगी, डोहाडांगी और पतीलाभाषा क्षेत्र से होकर गुजरेगी। पतीलाभाषा घाट के पास चेंगा नदी पर नया रेलवे पुल भी बनाया जाएगा। इसके बाद यह लाइन पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर चतरहाट के पास मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम होगी परियोजना

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे चिकन नेक कहा जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण भूभाग है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन (तिब्बत) की सीमाओं के निकट स्थित है।

नई रेल लाइन बनने से सेना की आवाजाही, रक्षा आपूर्ति, आपदा प्रबंधन, माल परिवहन और पूर्वोत्तर राज्यों तक रेल संपर्क को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही भविष्य में किसी आपात स्थिति में रेलवे के पास वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहेगा।

क्षेत्रीय विकास को भी मिलेगा बढ़ावा

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। माल परिवहन आसान होने के साथ स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। तकनीकी सर्वे पूरा होने के बाद अंतिम रूट तय किया जाएगा और परियोजना को अगले चरण में आगे बढ़ाया जाएगा।

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