धनबाद: हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैय्या की आराधना की जाती है। यह पर्व साल में दो बार—चैत्र और कार्तिक माह में—मनाया जाता है।
साल 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ हो रही है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व अनुशासन, आस्था और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
नहाय-खाय छठ का पहला दिन होता है, जो शुद्धता और पवित्रता का संदेश देता है। इस दिन व्रती पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान कर अपने तन और मन को शुद्ध करते हैं। इसके बाद घर में सात्विक भोजन बनाया जाता है, जिसमें कद्दू की सब्जी, चना दाल और अरवा चावल प्रमुख होते हैं।
यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है। नहाय-खाय के साथ ही छठ व्रत की कठिन साधना का आरंभ होता है, जो अंततः उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होता है।
छठ पर्व हमें सादगी, शुद्धता और अटूट विश्वास का संदेश देता है।






















